
बिहार चुनाव, कॉन्सेप्ट फोटो
Close Fight Seats in Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजग को प्रचंड बहुमत मिला, लेकिन चुनाव परिणाम में 9 सीटें ऐसी रहीं जहां जीत का अंतर 1000 वोटों से भी कम था। संदेश सीट पर तो यह फासला केवल 27 वोटों का था। विपक्ष ने इन परिणामों पर अनियमितता के आरोप लगाए हैं, जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत प्राप्त किया। इस जीत में भाजपा ने 89 और जदयू ने 85 सीटें हासिल कीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दसवीं बार सत्ता में वापसी कर रहे हैं। वहीं विपक्षी महागठबंधन को महज 35 सीटें मिलीं। एनडीए की इस विशाल जीत के बीच, कुल 9 सीटों पर जीत का अंतर 1000 वोटों से भी कम रहा, जिसने नतीजों को रोमांचक बना दिया। चुनाव में रिकॉर्ड 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी ने निर्णायक भूमिका निभाई।
इन निकटतम मुकाबलों में संदेश (भोजपुर) की सीट सबसे अधिक चर्चा में रही, जहां जदयू के राधा चरण साह ने राजद के दीपू सिंह को केवल 27 वोटों के मामूली अंतर से हराया। 27 वोटों की यह जीत बिहार के चुनावी इतिहास में सबसे कम अंतरों में से एक है।
अन्य करीबी परिणाम इस प्रकार रहे:
• रामगढ़ (कैमूर) में बसपा के सतीश कुमार सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार सिंह को 30 वोटों से पराजित किया।
• आगिआंव (भोजपुर) में भाजपा के महेश पासवान ने माले उम्मीदवार को 95 वोटों से हराया।
• चनपटिया (पश्चिम चंपारण) में कांग्रेस के अभिषेक रंजन ने भाजपा को 602 वोटों से शिकस्त दी।
• जहानाबाद में राजद के राहुल कुमार ने जदयू को 793 वोटों से हराया।
विपक्ष ने इन करीबी सीटों पर मतगणना में अनियमितता का आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि “कई सीटों पर खेल हुआ है”। राहुल गांधी ने भी चुनाव को शुरुआत से ही “अनुचित” बताया। हालांकि, चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
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लोगों ने इन आरोपों को जमीनी हकीकत से परे बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर चुनाव प्रशासन द्वारा कोई गड़बड़ी की गई होती, तो महागठबंधन के पक्ष में इतने कम फासले वाले चुनाव नतीजे आना असंभव होता। चंपारण क्षेत्र के परिणाम, जहां महागठबंधन ने तीन सीटें मामूली अंतर (जैसे ढाका सीट 178 वोटों से) से जीतीं, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता का प्रमाण हैं। यह करीबी जीतें यह सिद्ध करती हैं कि मतदाता लामबंदी स्वतंत्र रूप से निर्णायक रही।






