राजपुर विधानसभा: 40 साल बाद मिली कांग्रेस को जीत, इस बार दांव पर साख; जदयू से कड़ी टक्कर
Bihar Assembly Elections: इस बार राजपुर सीट पर कांग्रेस और जदयू के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस अपने विजयी उम्मीदवार विश्वनाथ राम पर फिर से भरोसा जताया है, जिनके सामने जीत को दोहराने की चुनौती है।
- Written By: मनोज आर्या
बिहार विधानसभा चुनाव 2025, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Rajpur Assembly Constituency: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बक्सर जिले की राजपुर विधानसभा सीट (सुरक्षित- SC) पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह सीट, जो बक्सर लोकसभा के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है, अपने अप्रत्याशित चुनावी इतिहास के लिए जानी जाती है। इस बार मुकाबला कांग्रेस के ऐतिहासिक विजय को दोहराने और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के लिए 2020 की हार का बदला लेने के मौके के इर्द-गिर्द केंद्रित है।
उलटफेर वाला रहा है चुनावी इतिहास
राजपुर विधानसभा सीट 1977 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और तब से यहां मतदाताओं ने किसी एक पार्टी को स्थायी वर्चस्व स्थापित करने नहीं दिया। शुरुआती दौर में 1977 में जनता पार्टी की जीत के बाद कांग्रेस को 1980 में पहली सफलता मिली। फिर भाजपा और सीपीआई का उदय हुआ। 1985 और 1990 में भाजपा ने लगातार दो बार जीत हासिल की, जबकि 1995 में सीपीआई ने पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2000 में बहुजन समाज पार्टी भी यहां से जीती।
फिर बन गया जदयू का गढ़
2005-2015 तक का इतिहास अलग है। 2005 के बाद राजपुर ने पार्टियों को बदलने का सिलसिला रोका और जदयू को अगले चार चुनावों तक लगातार जीत दिलाई, जिससे यह सीट एक दशक तक पार्टी का गढ़ बन गई। हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनाव में राजपुर में एक बड़ा उलटफेर हुआ, जिसने जदयू के वर्चस्व को तोड़ दिया। कांग्रेस के उम्मीदवार विश्वनाथ राम ने जदयू के दिग्गज नेता संतोष कुमार निराला को पराजित किया।
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यह जीत कांग्रेस के लिए 40 वर्षों बाद इस सीट पर मिली दूसरी सफलता थी, जिसने पार्टी में एक नया उत्साह भर दिया। दिलचस्प बात यह है कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद को आज तक इस सीट पर कभी सफलता नहीं मिली है, जिससे राजपुर में महागठबंधन की जीत की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कांग्रेस पर रही है।
जदूय और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर
2025 के चुनाव में राजपुर की लड़ाई कांग्रेस और जदयू के बीच प्रतिष्ठा की बन गई है। कांग्रेस ने अपने विजयी उम्मीदवार विश्वनाथ राम पर फिर से भरोसा जताया है, जिनके सामने 2020 की जीत को दोहराने और सीट पर पार्टी की वापसी को स्थायी बनाने की चुनौती है। वहीं जदयू ने अपने अनुभवी नेता संतोष कुमार निराला को फिर से मैदान में उतारा है। जदयू के लिए यह चुनाव सिर्फ सीट जीतने का नहीं, बल्कि 2005 से 2015 तक अपनी पारंपरिक सीट पर 2020 में मिली हार का बदला लेने का मौका है।
इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से धनंजय कुमार मैदान में हैं, जो अपने स्थानीय और जातिगत समर्थन के आधार पर दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
भौगोलिक और सामाजिक आधार
राजपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां SC समुदाय के मतदाता चुनावी परिणाम में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र समतल और उपजाऊ मैदानी भागों वाला है, जो कृषि के लिए अनुकूल है। राजपुर सोन नदी और इटाढ़ी गंगा नदी के निकट स्थित हैं। इसके पास निकटवर्ती शहरों में सासाराम, बक्सर और डेहरी-ऑन-सोन जैसे शहर हैं।
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इस चुनाव में, राजपुर की जनता एक बार फिर इतिहास रचेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कांग्रेस के साथ अपनी नई राजनीतिक यात्रा जारी रखती है या जदयू को अपनी दशकों पुरानी सीट पर फिर से काबिज होने का मौका देती है।
