बाढ़ विधानसभा: बिहार के ‘मिनी चित्तौगढ़’ में NDA की अग्निपरीक्षा, किला भेदने की तैयारी में राजद
Bihar Assembly Elections: पटना जिले की बाढ़ विधानसभा क्षेत्र ऐसी ही एक सीट है, जिसे इसके गहरे राजपूत प्रभाव के चलते ‘बिहार का मिनी चित्तौड़गढ़’ कहा जाता है। इस सीट पर अब तक कुल 17 चुनाव हो चुके हैं।
- Written By: मनोज आर्या
बिहार विधानसभा चुनाव 2025, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Barh Assembly Constituency: बिहार की राजनीति में कुछ सीटें महज संख्या नहीं होतीं, वे इतिहास, जातीय समीकरण और दबदबे का प्रतीक होती हैं। पटना जिले की बाढ़ विधानसभा क्षेत्र ऐसी ही एक सीट है, जिसे इसके गहरे राजपूत प्रभाव के चलते ‘पटना का मिनी चित्तौड़गढ़’ कहा जाता है। 1951 में अस्तित्व में आने के बाद, बाढ़ का चुनावी सफर कुल 17 चुनावों का साक्षी रहा है, और यह उपनाम बताता है कि यहां की राजनीति की चौखट राजपूत मतदाताओं की इच्छाशक्ति से ही होकर गुजरती है।
भाजपा का अभेद्य किला और ‘ज्ञानू’ का दबदबा
एक समय कांग्रेस का मजबूत किला रही यह सीट, 1985 के बाद से कांग्रेस के हाथों से फिसल गई। आज यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक मजबूत गढ़ है। इस गढ़ को मजबूती देने वाले विधायक हैं ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’, जो इस सीट से लगातार चार बार (2005 से 2020) विधायक चुने गए हैं। उन्होंने यह जीत जदयू और बाद में भाजपा के टिकट पर हासिल की है, जो एनडीए के लंबे समय के दबदबे को दिखाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में ज्ञानू ने कांग्रेस के सत्येंद्र बहादुर को 10,240 वोटों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी।
निर्णायक जातीय गणित
2020 के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,80,165 पंजीकृत मतदाता थे। कहा जाता है कि यहां राजनीति की दिशा तय करने वाला मुख्य आधार राजपूत और यादव वोटरों का है। अनुसूचित जाति के वोटर 19.07% और 3.3 % मुस्लिम भी निर्णायक भूमिका निभा देते हैं। यह क्षेत्र आज भी मुख्यतः ग्रामीण (लगभग 85%) है, जिसका मतलब है कि ग्रामीण मुद्दे, कृषि और बुनियादी ढांचा चुनावी विमर्श में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। यह सीट मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2025 का चुनाव बाढ़ में राजपूत वर्चस्व को चुनौती देने वाले जातीय समीकरणों और भाजपा के मौजूदा विधायक की लगातार जीत के बीच एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
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मौजूदा समीकरण पर चुनौती
2025 के विधानसभा चुनाव में, ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’ की लगातार यह पांचवीं जीत हासिल करने की कोशिश उनकी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। पिछले चुनाव में उनकी जीत का अंतर (6.90%) 2015 की तुलना में कम हुआ था, और कुल मतदान प्रतिशत में भी गिरावट (2015 में 55.31% से 2020 में 53.66%) दर्ज की गई थी, जो कम होते उत्साह या बदलती हवा का संकेत दे सकता है।
इस बार, मुख्य मुकाबला NDA (भाजपा) और महागठबंधन (RJD/कांग्रेस) के बीच होने की संभावना है, जहां यादव और मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण ज्ञानू के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकता है, खासकर यदि महागठबंधन कोई मजबूत राजपूत या यादव चेहरा उतारता है। बाहुबली नेताओं की राजनीति से सटे इस क्षेत्र में विकास बनाम जातीय गणित की लड़ाई रोमांचक होने की उम्मीद है।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी शानदार
बाढ़ सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि इतिहास का एक पन्ना है। इसे भारत के सबसे पुराने अनुमंडलों में गिना जाता है। इसका इतिहास मुगलकाल से भी पुराना है, जहां 1495 में सिकंदर लोदी और बंगाल के शासकों के बीच ‘शांति संधि’ हुई थी। शेरशाह सूरी ने 16वीं सदी में यहां व्यापारियों के लिए एक विशाल सराय का निर्माण भी कराया था। गंगा के तट पर होने के कारण यह हमेशा से ही व्यापार और परिवहन का केंद्र रहा है।
