बांका विधानसभा: कभी था कांग्रेस का गढ़, अब भाजपा का दबदबा! क्या रामनारायण मंडल लगाएंगे जीत का चौका?
Bihar Assembly Elections: बांका विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास 1951 से शुरू हुआ और अब तक यह 20 चुनावों का गवाह बन चुका है।स्वतंत्रता के बाद शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का प्रभुत्व रहा है।
- Written By: मनोज आर्या
बिहार विधानसभा चुनाव 2025, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Banka Assembly Constituency: बिहार के दक्षिण-पूर्वी सिरे पर स्थित बांका विधानसभा सीट, जो अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के कारण झारखंड से मिलती-जुलती है, इस बार चुनावी दृष्टि से काफी अहम है। कभी कांग्रेस का मजबूत किला रहा यह क्षेत्र अब पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभुत्व में है, जहां वर्तमान विधायक रामनारायण मंडल लगातार चौथी बार जीत का चौका लगाने की तैयारी में हैं।
भाजपा का वर्चस्व: रामनारायण मंडल का विजय रथ
बांका विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास 1951 से शुरू हुआ और अब तक यह 20 चुनावों (उपचुनावों सहित) का गवाह बन चुका है।स्वतंत्रता के बाद शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का प्रभुत्व रहा, जिसने सात बार जीत दर्ज की। हालांकि, 1985 के बाद से कांग्रेस इस सीट पर कभी जीत नहीं दर्ज कर पाई। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह कांग्रेस के अंतिम विजेता रहे।
बांका सीट का चुनावी इतिहास
1985 के बाद से यह सीट भाजपा और राजद के बीच केंद्रित हो गई। भाजपा (भारतीय जनसंघ की जीत सहित) ने अब तक आठ बार जीत दर्ज की है, जो इस क्षेत्र में उसके बढ़ते दबदबे को दर्शाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामनारायण मंडल ने राजद के जावेद इकबाल अंसारी को हराकर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की थी।
सम्बंधित ख़बरें
सम्राट चौधरी ने विधानसभा में ध्वनिमत से जीता विश्वास मत, तीखी बहस के बाद विपक्ष हुआ ढेर, नए युग की हुई शुरुआत
यूपी चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने किया बड़ा सियासी ऐलान, गठबंधन में लड़ेंगे विधानसभा चुनाव 2027
महिला आरक्षण बिल के बाद होगा एक और वार…इंडिया गठबंधन ने बनाया प्लान, ज्ञानेश कुमार की बढ़ने वाली है मुसीबत!
विपक्ष को भारी पड़ेगा महिला आरक्षण का विरोध? बीजेपी ने बनाया बंगाल-तमिलनाडु चुनाव के लिए मास्टरप्लान!
2025 का सियासी मुकाबला
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपने अनुभवी नेता रामनारायण मंडल को उम्मीदवार बनाया है, जिनके सामने अपनी जीत की हैट्रिक को चौके में बदलने की चुनौती है। इस बार मुख्य मुकाबले से राजद का उम्मीदवार बाहर दिख रहा है, जिससे रामनारायण मंडल को बड़ी राहत मिल सकती है। राजद ने दो बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
2025 विधानसभा के चुनावी मैदान में कुल 14 उम्मीदवार हैं, जिनमें प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से कौशल कुमार सिंह और वामपंथी दल सीपीआई से संजय सिंह शामिल हैं। इन दलों की उपस्थिति भाजपा के वोटों को प्रभावित कर सकती है।
बांका सीट का जातीय समीकरण
बांका सीट पर जातीय समीकरणों का प्रभाव साफ दिखता है। मुस्लिम और यादव वोटर इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक रूप से ये वोट राजद के पक्ष में जाते रहे हैं, लेकिन भाजपा की लगातार जीत यह दर्शाती है कि वह गैर-यादव ओबीसी, सवर्ण और अन्य हिंदू वोटों को एकजुट करने में सफल रही है। इसके अलावा राजपूत, कोइरी और रविदास मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
ये भी पढ़ें: दानापुर विधानसभा: लालू यादव की धरती पर राजद-भाजपा में बराबरी का मुकाबला, कौन मारेगा बाजी?
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
बांका का महत्व सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यहां मंदार पर्वत स्थित है, जिसे पौराणिक ‘समुद्र मंथन’ की घटना से जोड़ा जाता है। इसके अलावा चानन नदी यहां से बहती है, जो आगे चलकर गंगा में मिलती है। काली मंदिर और तारा मंदिर (बाबूटोला ओढ़नी तट) स्थानीय लोगों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। 2025 का चुनाव यह तय करेगा कि क्या रामनारायण मंडल अपना विजय रथ जारी रखते हैं और भाजपा बांका में अपनी पकड़ को अभेद्य किला बनाती है या विपक्षी दल इस गढ़ में सेंध लगाने में सफल होते हैं।
