बिहार में दोनों सदनों पर होगा बीजेपी का कब्जा या अभी लड़ाई बाकी है? सियासी हलचल तेज
Bihar News: बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर BJp और JDU आमने-सामने हैं। गृह मंत्रालय मिलने के बाद बीजेपी स्पीकर पद चाहती है, जबकि जेडीयू संतुलन बनाए रखना चाहती है।
- Written By: अक्षय साहू
प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Image- Social Media)
Bihar Politics: बिहार में नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे के बाद अब राजनीतिक हलचल विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के चुनाव को लेकर तेज हो गई है। 20 साल में पहली बार गृह मंत्रालय बीजेपी के पास आया है, जिससे गठबंधन में उसकी भूमिका जेडीयू से बड़ी हो गई है। ऐसे में अब स्पीकर पद को लेकर बीजेपी और जेडीयू दोनों अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को नई कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जाएगा। इसी विशेष सत्र में 243 नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और बाद में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा।
नतीजों के बाद बदले समीकरण
पिछली सरकार के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास था जबकि गृह विभाग जेडीयू संभाल रही थी। लेकिन इस बार पूरा समीकरण उलट गया है। नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय छोड़कर बीजेपी को दे दिया है, जिससे बीजेपी की ताकत बढ़ी है। अब वह स्पीकर पद भी अपने पास रखने की इच्छा जता रही है। पार्टी में गयाजी से लगातार नौ बार विधायक बने प्रेम कुमार को इसका प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। कैबिनेट में इस बार उन्हें जगह नहीं मिली, इसलिए उनका नाम स्पीकर के लिए और मजबूत माना जा रहा है।
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बीजेपी 2020 में विजय कुमार सिन्हा और 2024 में नंद किशोर यादव को स्पीकर बना चुकी है। हालांकि इस बार नंद किशोर यादव चुनाव नहीं लड़े। ऐसे में बीजेपी अपने नेतृत्व का अनुभव और वरिष्ठता का तर्क देते हुए फिर यह पद चाहती है।
पावर बैलेंस करने की कोशिश में जेडीयू
दूसरी ओर जेडीयू पावर बैलेंस बनाए रखने के लिए स्पीकर पद पर खुद का दावा ठोंक रही है। जेडीयू का कहना है कि विधान परिषद के अध्यक्ष (स्पीकर) पहले से ही बीजेपी से हैं। अवधेश नारायण सिंह अगर विधानसभा में भी स्पीकर बीजेपी से होगा, तो दोनों सदनों पर एक ही पार्टी का नियंत्रण होगा, जो गठबंधन के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
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साथ ही जेडीयू का तर्क है कि उन्होंने बिहार का सबसे शक्तिशाली मंत्रालय, यानी गृह विभाग, बीजेपी को दे दिया है, इसलिए स्पीकर पद उन्हें मिलना चाहिए। अब सारी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी और जेडीयू के बीच क्या समझौता बनता है और अंततः विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी किसके खाते में जाती है।
