बिहार में NDA की आंधी के पीछे शाह के ‘मास्टरस्ट्रोक’, वो 5 दांव जिससे पलटी हारी हुई बाजी
Bihar Election Final Result में NDA की शानदार जीत की गूंज पूरे देश में है। वहीं इस जीते के पीछे के आंकलन अब आने शुरू हो गए है, जिसमें अमित शाह की इन रणनीतियों की बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है।
- Written By: सौरभ शर्मा
अमित शाह (फोटो- सोशल मीडिया)
Bihar Election Final Result: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की शानदार जीत की गूंज हर तरफ है। इस जीत को सिर्फ एक नेता या पार्टी की सफलता नहीं कहा जा सकता। लेकिन, इस अजेय मोर्चे के पीछे की कहानी बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह के सुनियोजित ‘पंचतंत्र’ की है। उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर ऐसी रणनीति बनाई जिसने विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया।
बिहार में जब सभी पार्टियों के स्टार प्रचारक ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे थे, तब अमित शाह भी पटना पहुंचे, लेकिन प्रचार में शामिल नहीं हुए। दो से तीन दिन वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे, क्योंकि वह भीतर-भीतर एक खास मिशन पर लगे थे। नतीजों ने साबित कर दिया कि उनकी यही सूक्ष्म रणनीति चुनावी जीत की नींव बनी।
1. बागियों को मनाने का ‘साइलेंट’ अभियान
शाह की पहली कड़ी असंतोष शांत करना था। उन्होंने दो-तीन दिन सार्वजनिक कार्यक्रम न करके अपना पूरा ध्यान नाराज बागी नेताओं पर लगाया। उन्होंने व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें मनाया। भागलपुर की डॉ प्रीति शेखर और अमरपुर के मृणाल शेखर, जो बागी लड़ने वाले थे, शाह के समझाने पर मान गए। इस ‘स्ट्रेटजिक साइलेंस’ ने एनडीए को अंदरूनी फूट से बचा लिया।
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2. गठबंधन की गांठ मजबूत रखना
बिहार की राजनीति में गठबंधन साधना चुनौती रही है। एनडीए में बीजेपी, जेडीयू, लोजपा व अन्य दल थे। अमित शाह ने सभी दलों के शीर्ष नेतृत्व से लगातार संपर्क बनाए रखा और किसी भी गलतफहमी को तुरंत दूर किया। उनकी सतर्कता ने गठबंधन को एकजुट रखा और विपक्ष को कोई मौका नहीं दिया।
3. LJP और JDU के बीच समन्वय
सबसे बड़ी चुनौती लोजपा और जेडीयू के जमीनी तनाव को खत्म करना था। शाह ने इस पर महीन प्रबंधन दिखाया। बीजेपी के संगठन ने दोनों दलों के बीच ‘समन्वय समिति’ का काम किया। नतीजा ये हुआ कि जो चिराग पासवान पहले नीतीश सरकार पर सवाल उठाते थे, वो बाद में प्रशंसा करने लगे।
4. वोट शेयरिंग की माइक्रो-प्लानिंग
जीत का बड़ा आधार वोटों का एकमुश्त होना था। शाह ने माइक्रो-प्लानिंग पर ध्यान दिया। उन्होंने बूथ और ब्लॉक कार्यकर्ताओं से सीधी बैठकें कीं और समझाया कि कैसे गठबंधन साथी के लिए काम करना है। इस ‘ग्राउंड जीरो’ रणनीति ने गठबंधन के वोटों को एक साथ लाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
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5. प्रवासी कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क
अमित शाह ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया। वह वीडियो कॉल के जरिए देश के दूसरे हिस्सों में रह रहे बिहार के प्रवासी कार्यकर्ताओं से जुड़े। उन्होंने इन कार्यकर्ताओं को अपने इलाकों में परिवार और जानने वालों से संपर्क कर चुनावी संदेश फैलाने और मतदान के लिए प्रेरित करने का काम सौंपा।
