Toyota की सरकार से सीधी अपील: क्या जल्द कम होंगे फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के दाम?
Hybrid Flex Fuel Cars: भारत में एथनॉल-आधारित मोबिलिटी को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच Toyota Kirloskar Motor ने गुरुवार को केंद्र सरकार से उन नीतिगत खामियों को दूर करने की अपील की है।
- Written By: सिमरन सिंह
Flex Fuel Vehicles क्या होता है। (सौ. Freepik)
Flex Fuel Vehicles: भारत में एथनॉल-आधारित मोबिलिटी को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच Toyota Kirloskar Motor ने गुरुवार को केंद्र सरकार से उन नीतिगत खामियों को दूर करने की अपील की, जो देश के तेजी से बढ़ रहे एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की गति को धीमा कर सकती हैं। ट्रिवेणी इंजीनियरिंग के साबितगढ़ शुगर मिल के मीडिया दौरे के दौरान, कंपनी के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स) विक्रांत गुलाटी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) और हाइब्रिड फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए अलग टैक्स संरचना की जरूरत है।
उच्च टैक्स बोझ बना बड़ी चुनौती
गुलाटी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से वाहन बनाने की लागत में ₹40,000–₹50,000 तक की बढ़ोतरी हो जाती है, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड FFVs पर ₹3 लाख–₹3.25 लाख तक अतिरिक्त निर्माण लागत आती है। टैक्स लगने के बाद यह लागत बढ़कर: FFVs के लिए लगभग ₹80,000 और हाइब्रिड फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए लगभग ₹5 लाख हो जाती है।
उन्होंने कहा, “फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग लागत ₹50,000 से बढ़कर ₹80,000 हो गई है, और इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल मॉडलों में यह करीब ₹4.8 लाख है। इसमें से लगभग ₹1.8 लाख अनजाने में लगने वाला अतिरिक्त टैक्स है। हमें टैक्सेशन को मेरिट रेजीम में बहाल करने की आवश्यकता है।” जापानी कार निर्माता का मानना है कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड FFVs न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देंगे, बल्कि अमेरिका के टैरीफ और चीन में रेयर-अर्थ धातुओं की सीमित आपूर्ति जैसे भू-राजनीतिक जोखिमों से देश को बचाने में भी मदद करेंगे।
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भारत में एथनॉल की प्रचुर उपलब्धता
वर्तमान में भारत के पास एथनॉल का पर्याप्त अधिशेष है, जो फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने का अवसर देता है। ISMA के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी ने बताया कि OMCs ने 2025–26 के लिए 1,048 करोड़ लीटर एथनॉल खरीदने का वादा किया है, जबकि उत्पादन करीब 1,900 करोड़ लीटर रहने का अनुमान है।
उन्होंने जोड़ा, “औद्योगिक मांग 330 करोड़ लीटर पूरी करने के बाद भी 450 करोड़ लीटर से अधिक क्षमता बिना उपयोग के बच जाएगी।” केंद्र ने इस साल जुलाई में निर्धारित समय से 5 साल पहले ही 20% एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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तकनीकी जोखिम और दक्षता पर सवाल
उद्योग ने 20% ब्लेंडिंग को स्वीकार किया है, लेकिन अभी भी टैक्सेशन, लाइफसाइकल कार्बन अकाउंटिंग और उपभोक्ता इंसेंटिव्स को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उच्च एथनॉल मिश्रण से दक्षता में गिरावट की चिंताओं पर गुलाटी ने कहा कि E100 पर चलने से वाहन की एफिशिएंसी कम होती है, इसलिए स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल्स सबसे बेहतर रेंज प्रदान करने में सक्षम हैं।
क्लीन टेक्नोलॉजी को मिले समर्थन की जरूरत
CAFE 3 ड्राफ्ट में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मान्यता पर गुलाटी ने कहा, “फाइनल ड्राफ्ट में सभी क्लीन टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक, फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल को शामिल किया गया है।” उन्होंने कहा कि एथनॉल की आसान उपलब्धता, मजबूत सप्लाई चेन और शून्य भू-राजनीतिक जोखिम इसे भारत के लिए क्लीन फ्यूल में बदलने का एक व्यवहारिक विकल्प बनाते हैं। गुलाटी ने conclude करते हुए कहा, “ICE तकनीक में भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है। एथनॉल इस इकोसिस्टम को बनाए रखते हुए इसे क्लीन भी बनाता है।”
