

Indian Automobile Market: भारत के कार बाजार में पिछले कुछ सालों में बड़ा बदलाव आया है। कारों की कुल बिक्री बढ़ रही है लेकिन खरीदारों की पसंद पहले जैसी नहीं रही है। वहीं कभी आम परिवारों की पहली पसंद मानी जाने वाली 10 लाख रुपये से कम कीमत की कारों की बाजार हिस्सेदारी तेजी से घटी है। साथ ही दूसरी ओर महंगी कारों और SUV की मांग बढ़ी है। ऐसे में सवाल है कि आखिर भारतीय ग्राहक अब कार खरीदते समय किन बातों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं?
उपलब्ध आंकड़ों में बताया जा रहा है कि पिछले छह साल में भारत में कारों की कुल बिक्री 54 फीसदी बढ़ी है। लेकिन इस ग्रोथ का फायदा सभी प्राइस सेगमेंट को एक जैसा नहीं मिला रहा। बाजार में सस्ती कारों और महंगे मॉडल के बीच अंतर अब पहले से ज्यादा साफ दिखाई देने लगा है।
भारत के यात्री वाहन बाजार में बिक्री बढ़ने के साथ ग्राहकों की पसंद भी बदली है। इसमें साल 2019 में 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की कुल बाजार हिस्सेदारी 80.4 फीसदी थी। वहीं साल 2025 तक यह घटकर 52 फीसदी रह गई।
इसका मतलब है कि छह साल में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत अंक कम हुई। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सस्ती कारों की बिक्री पूरी तरह गिर गई है। वहीं बाजार हिस्सेदारी में कमी यह बताती है कि कुल बिक्री में दूसरे कीमत वाले सेगमेंट का योगदान बढ़ा है।
दूसरी तरफ 10 लाख रुपये से महंगी कारों की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी से बढ़कर 2025 में 48.1 फीसदी तक पहुंच गई। जिसका सीधा मतलब है कि अब बाजार में बिकने वाली कारों में महंगे मॉडल की मौजूदगी पहले से काफी ज्यादा है।
वहीं SUV की बढ़ती लोकप्रियता भी इस बदलाव को समझने का एक अहम पहलू है। कई खरीदार अब कार चुनते समय केवल शुरुआती कीमत ही नहीं बल्कि डिजाइन, केबिन स्पेस, आराम और उपलब्ध सुविधाओं को भी महत्व देते हैं। लेकिन इन कारणों का अलग-अलग योगदान जानने के लिए विस्तृत बिक्री और ग्राहक सर्वे के आंकड़ों की जरूरत होगी।
कारों की कीमतों में बढ़ोतरी, सुरक्षा सुविधाओं की मांग और ज्यादा फीचर्स वाले मॉडल की उपलब्धता इस बदलाव के संभावित कारण हो सकते हैं। इसके अलावा SUV का ऊंचा स्टांस, ज्यादा स्पेस और अलग डिजाइन भी कुछ खरीदारों को आकर्षित करते हैं। लेकिन हर ग्राहक की प्राथमिकता एक जैसी नहीं होती और बजट अब भी कार खरीदने का अहम आधार है।
वहीं कार की शुरुआती कीमत के साथ बीमा, ईंधन, मेंटेनेंस और लोन की EMI जैसे खर्च भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं। इसलिए महंगी कारों की बढ़ती हिस्सेदारी को यह मानकर नहीं देखना चाहिए कि सभी परिवारों की खरीदने की क्षमता बढ़ गई है।
नहीं, 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की हिस्सेदारी 2025 में भी 52 फीसदी थी। यानी इस सेगमेंट का बाजार में अब भी बड़ा योगदान है। लेकिन आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि महंगे मॉडल की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
खरीदारों के लिए जरूरी है कि वे केवल फीचर्स या SUV के डिजाइन से प्रभावित होकर फैसला न लें। कार की ऑन-रोड कीमत, माइलेज, सुरक्षा, सर्विस खर्च और अपनी जरूरतों का आकलन करना ज्यादा उपयोगी रहेगा। बाजार में किस सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़ रही है यह जानना ट्रेंड समझने में मदद करता है लेकिन सही कार का चुनाव अपने बजट और इस्तेमाल के हिसाब से ही करना चाहिए।