पराली से बनेगा पेट्रोल का विकल्प, 2G इथेनॉल से टेंशन खत्म, किसानों और पर्यावरण दोनों को होगा बड़ा फायदा
2G Ethanol: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत, आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल को बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है लेकिन अब इसको लेकर चर्चा सिर्फ इथेनॉल तक सीमित नहीं है।
- Written By: सिमरन सिंह
Ethanol (Source. Freepik)
Ethanol Fuel India: भारत में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत, आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल को बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है लेकिन अब इसको लेकर चर्चा सिर्फ इथेनॉल तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी नई और ज्यादा उन्नत तकनीक जिसको 2G इथेनॉल कहते है तेजी से सुर्खियां बटोर रही है। वहीं इसकी खास बात यह है कि यह इथेनॉल अनाज या गन्ने के रस से नहीं बल्कि खेतों में बचने वाले कृषि कचरे से तैयार होता है।
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि 2G इथेनॉल न केवल ईंधन संकट को कम कर सकता है लेकिन इसके साथ ही पराली जलाने जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्या का भी समाधान कर सकता है।
क्या है 2G इथेनॉल और क्यों है खास?
पहली पीढ़ी का इथेनॉल जिसको 1G Ethanol कहते है वो गन्ने के रस और अनाज से बनाया जाता है। इस कारण से कई बार खाद्यान्न संकट और फसल उपयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन दूसरी पीढ़ी का इथेनॉल जिसको 2G Ethanol कहते है पूरी तरह कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है। इसे पराली, गन्ने की खोई, मक्के के डंठल और बांस जैसे कृषि कचरे से तैयार किया जाता है और इस वजह के कारण यह तकनीक खाद्यान्न सुरक्षा पर कोई दबाव नहीं डालती और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकती है।
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कैसे तैयार होता है 2G इथेनॉल?
2G इथेनॉल के तैयार होने की प्रक्रिया पर नजर डाले तो इसका उत्पादन आधुनिक तकनीक से किया जाता है।
- सबसे पहले कृषि कचरे को इकट्ठा करें
- उसके छोटे-छोटे टुकड़े करें
- इसके बाद विशेष रासायनिक प्रक्रिया और एंजाइम्स की मदद से उसमें मौजूद जटिल शर्करा को साधारण शर्करा में बदलें
- फिर यीस्ट के जरिए फर्मेंटेशन की प्रक्रिया पूरी करें, जिससे अल्कोहल तैयार होता है।
- अंत में डिस्टिलेशन के जरिए शुद्ध 2G इथेनॉल प्राप्त किया जाता है।
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सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है इसका उपयोग
2G इथेनॉल को सिर्फ गाड़ियों तक ही इस्तेमाल के लिए सीमित ईंधन नहीं माना गया है। इसका उपयोग Sustainable Aviation Fuel (SAF) बनाने में भी किया जा रहा है जिससे हवाई जहाजों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। वहीं पेंट, कॉस्मेटिक्स, दवाइयों और प्लास्टिक उद्योग में भी इसकी मांग काफी अधिक है। इसके अलावा रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इससे बायोप्लास्टिक भी बनाया जा सकता है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आसानी से नष्ट हो जाता है।
किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद
जैसा ही सभी को पता है कि भारत में हर साल पराली जलाने की वजह से प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन जाता है। 2G इथेनॉल तकनीक इस कृषि कचरे को मूल्यवान संसाधन में बदल सकती है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी।
