Honda Motor (Source. Honda)
Honda Electric Vehicle Strategy: जापान की मशहूर ऑटोमोबाइल कंपनी होंडा मोटर को इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि 1950 के दशक में बाजार में प्रवेश करने के बाद पहली बार उसे सालाना स्तर पर नुकसान का सामना करना पड़ा है।
इस खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के शेयरों में 6 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। साथ ही यह भी सामने आया है कि अपनी इलेक्ट्रिक वाहन रणनीति में बदलाव के कारण कंपनी को लगभग 16 बिलियन डॉलर तक का भारी खर्च और संभावित नुकसान झेलना पड़ सकता है।
होंडा ने अपनी आधिकारिक घोषणा में बताया कि कुछ बड़े आर्थिक और नीतिगत बदलावों के कारण उसे अपनी EV रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा। कंपनी के मुताबिक अमेरिका में इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म होना और पेट्रोल-डीजल वाहनों से जुड़े नियमों में ढील मिलना उनके लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में इलेक्ट्रिक कारों की मांग में अचानक आई गिरावट ने भी कंपनी की योजनाओं को प्रभावित किया। यही वजह है कि होंडा को अपने कई इलेक्ट्रिक मॉडल्स के डेवलपमेंट और लॉन्चिंग प्रोजेक्ट्स को बीच में ही रोकना पड़ा।
अमेरिका के अलावा एशियाई बाजारों में भी होंडा को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर चीन के ऑटोमोबाइल बाजार में स्थानीय कंपनियों के बढ़ते दबदबे ने होंडा की स्थिति को कमजोर कर दिया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि चीन में किए गए कुछ निवेशों की वैल्यू कम करनी पड़ सकती है। इससे आने वाले समय में कंपनी की वित्तीय रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर रणनीति में बदलाव करने वाली होंडा अकेली कंपनी नहीं है। हाल के महीनों में फोर्ड और स्टेलेंटिस जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों ने भी अपने EV प्लान में संशोधन करने का फैसला लिया है। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की मांग और नीतियों के अनुसार अपनी रणनीतियों को फिर से तय कर रही है।
ये भी पढ़े: मिडिल क्लास परिवार हो जाएगा खुश, अब सस्ती कारों में भी मिल रहा ADAS सेफ्टी फीचर
भारतीय बाजार को लेकर होंडा की रणनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी भारत में पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के बजाय हाइब्रिड (पेट्रोल + इलेक्ट्रिक) मॉडल्स पर ज्यादा ध्यान देने की योजना बना रही है।
दरअसल भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, जिसके कारण कई ग्राहक इलेक्ट्रिक कार खरीदने से हिचकते हैं। ऐसे में होंडा अपने संसाधनों को EV प्रोजेक्ट्स से हटाकर हाइब्रिड लाइनअप को मजबूत करने की तैयारी कर सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि कंपनी का मोटरसाइकिल कारोबार अभी भी मजबूत प्रदर्शन कर रहा है, जिससे कारों के बिजनेस में हो रहे नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो रही है।