Electric Vehicle (Source. Freepik)
Electric Vehicle Safety: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प होने की वजह से अब मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवार भी EV की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। हालांकि, EV खरीदना जितना आसान लग रहा है, उसे सही तरीके से चार्ज करना उतना ही जरूरी भी है। चार्जिंग में की गई छोटी-सी गलती न सिर्फ बैटरी की लाइफ कम कर सकती है, बल्कि आग लगने जैसे गंभीर सेफ्टी रिस्क भी बढ़ा सकती है। ऐसे में EV चार्ज करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
EV चार्जिंग की सबसे पहली और अहम शर्त है सही चार्जर का चुनाव। भारत में ज्यादातर इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर CCS2 चार्जिंग प्लग को सपोर्ट करते हैं, लेकिन फिर भी चार्जिंग से पहले यह जरूर जांच लें कि चार्जर आपके वाहन के अनुकूल है या नहीं। हाईवे पर मिलने वाले सुपर-फास्ट चार्जर सफर के दौरान तो काफी मददगार होते हैं, लेकिन रोजाना इनका इस्तेमाल बैटरी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। फास्ट चार्जिंग से ज्यादा गर्मी पैदा होती है, जिससे बैटरी सेल धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए घर पर लगा AC चार्जर सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जाता है।
कई लोग यह सोचते हैं कि बैटरी को हमेशा 100 प्रतिशत चार्ज रखना सही होता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। रोजाना की ड्राइव के लिए EV बैटरी को करीब 80 प्रतिशत तक ही चार्ज करना बेहतर माना जाता है। इससे बैटरी पर दबाव कम पड़ता है और उसकी उम्र लंबी होती है। 100 प्रतिशत चार्ज का इस्तेमाल सिर्फ लंबी यात्रा के दौरान करें, जब ज्यादा रेंज की जरूरत हो।
EV चार्ज करते समय हमेशा कंपनी द्वारा दी गई या BIS सर्टिफाइड चार्जिंग केबल और प्लग का ही इस्तेमाल करें। सस्ती या लोकल केबल से शॉर्ट सर्किट और ओवरहीटिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हफ्ते में कम से कम एक बार केबल को ध्यान से जांचें। अगर कट, दरार या पिघलने के निशान दिखें, तो तुरंत केबल बदल देना ही समझदारी है। EV को हमेशा सूखी और अच्छी हवादार जगह पर चार्ज करें, क्योंकि पानी और बिजली का मेल बेहद खतरनाक हो सकता है। अगर चार्जिंग के दौरान जलने जैसी गंध, अजीब आवाज या ज्यादा गर्मी महसूस हो, तो तुरंत चार्जिंग बंद करें और सर्विस सेंटर से संपर्क करें।
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हर बार रातभर EV को चार्ज पर लगाना जरूरी नहीं होता। आजकल मिलने वाले मोबाइल ऐप्स की मदद से चार्जिंग शेड्यूल करना ज्यादा समझदारी भरा तरीका है। इससे बैटरी जरूरत के हिसाब से ही चार्ज होती है। इसके अलावा हर 10,000 किलोमीटर पर EV की सर्विस और जांच करवाना जरूरी है, ताकि छोटी तकनीकी समस्याएं समय रहते पकड़ में आ जाएं और भविष्य में बड़ा नुकसान न हो।