

Anti Reflective Solar Cells: सोलर एनर्जी एक ऐसी ताकत है जिसको भविष्य की तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है वहीं ये लोगों की नजर में स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के रूप में सामने है लेकिन इसकी दक्षता बढ़ाने की राह में एक बड़ी चुनौती धूप का रिफ्लेक्शन है। देखा गया है कि सोलर सेल पर पड़ने वाली सूरज की रोशनी का एक हिस्सा बिजली में बदलने के बजाय सतह से वापस लौट जाता है। जिसको लेकर अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या का संभावित समाधान प्रकृति के बेहद खूबसूरत जीव तितली के पंखों में खोजा लिया है। सामने आई रिसर्चर्स का मानना है कि तितली के काले पंखों की माइक्रोस्कोपिक संरचना की नकल करके सोलर सेल्स की रोशनी सोखने की क्षमता को काफी बेहतर किया जा सकता है।
बता दें कि तितलियों के पंखों पर दिखाई देने वाले रंग अक्सर उनकी सतह की सूक्ष्म संरचनाओं से बनते हैं। लेकिन कुछ प्रजातियों के काले पंखों की बनावट खास होती है। इन पंखों पर मौजूद काले स्केल्स सूरज की रोशनी को सोखने के साथ उसे अपनी संरचना के भीतर फंसा सकते हैं। इससे प्रकाश आसानी से वापस बाहर नहीं निकलता। वहीं रिसर्चर्स अब इसी प्राकृतिक डिजाइन को सिलिकॉन आधारित सोलर सेल्स पर लागू करने की संभावना तलाश रहे हैं। इसको लेकर मकसद साफ है जितनी ज्यादा रोशनी सेल के भीतर पहुंचेगी उतनी ही ज्यादा ऊर्जा बिजली में बदलने की संभावना होगी।
जानकारी में सामने आया है कि इस रिसर्च में चार काली तितली प्रजातियों के स्केल्स का अध्ययन किया गया। इनमें Tirumala limniace, Graphium doson, Papilio protenor और Ornithoptera priamus शामिल हैं। जिसमें Ornithoptera priamus के पंखों पर मौजूद एक समान V-आकार के छोटे-छोटे ग्रूव्स ने रिसर्चर्स का खास ध्यान खींचा। इस संरचना की वजह से विजिबल लाइट का रिफ्लेक्शन करीब 1 से 5 प्रतिशत तक सीमित हो सकता है।
कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए तितली से प्रेरित इस डिजाइन को सिलिकॉन सोलर सेल की सतह पर एंटी-रिफ्लेक्टिव पैटर्न के रूप में टेस्ट किया गया था। जिसके परिणामों में सिलिकॉन की सतह से होने वाला करीब 35 प्रतिशत से अधिक रिफ्लेक्शन घटकर 5 प्रतिशत से भी कम रह गया। जिसका सीधा मतलब है कि ज्यादा रोशनी सेल में प्रवेश कर सकेगी और ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ सकती है। सिमुलेशन में इस डिजाइन से सोलर पैनल की क्षमता में 66 प्रतिशत तक की संभावित बढ़ोतरी सामने आई है।
लेकिन देखा यह भी जा रहा है कि यह आंकड़ा कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है और इसे सीधे वास्तविक सोलर पैनल की क्षमता में 66 प्रतिशत बढ़ोतरी नहीं माना जा सकता। अब इस तकनीक की वास्तविक परिस्थितियों में टेस्टिंग जरूरी होगी। वहीं अगर प्रयोगशाला के परिणाम जमीन पर भी सफल साबित होते हैं तो तितली के पंखों से प्रेरित यह नेचर-इंस्पायर्ड डिजाइन भविष्य में सोलर पैनल को ज्यादा कुशल बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।