सेकेंड हैंड कार ली है? अब RC ट्रांसफर हुआ बेहद आसान, जानिए पूरा तरीका और जरूरी कागज़

Duplicate RC Online Process: सेकेंड हैंड गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती महंगाई के बीच लोग कम बजट में अपनी पसंदीदा कार खरीदना चाहते हैं, और ऐसे में पुरानी गाड़ियां सामने आ रही है।
Bought a second-hand car Transferring the Registration Certificate is easy
RC Transfer (Source. Freepik)
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RC Transfer From City To City: देश में सेकेंड हैंड गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती महंगाई के बीच लोग कम बजट में अपनी पसंदीदा कार खरीदना चाहते हैं, और ऐसे में पुरानी गाड़ियां बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही हैं। लेकिन गाड़ी खरीदने के बाद सबसे ज़रूरी काम होता है RC अपने नाम ट्रांसफर करवाना। अच्छी खबर यह है कि अब यह प्रक्रिया पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई है और इसे ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से पूरा किया जा सकता है।

RC ट्रांसफर क्यों है जरूरी?

सेकेंड हैंड कार खरीदने के बाद RC ट्रांसफर न कराने पर कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं। ट्रैफिक चालान, एक्सीडेंट या किसी भी कानूनी विवाद की ज़िम्मेदारी पुराने मालिक पर ही रहती है। इसलिए गाड़ी खरीदते ही तय समय के भीतर RC ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। नियमों के अनुसार, गाड़ी बेचने के 14 दिन के भीतर RC ट्रांसफर कराना अनिवार्य होता है।

सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले जरूरी बातें

RC ट्रांसफर से पहले गाड़ी की पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है। वाहन के इंश्योरेंस, पेंडिंग चालान, लोन या हाइपोथिकेशन की स्थिति जरूर जांचें। इसके बाद ही गाड़ी को अपने नाम करवाने की प्रक्रिया शुरू करें।

RC ट्रांसफर के लिए जरूरी दस्तावेज

RC ट्रांसफर के लिए आपको अपने नजदीकी RTO में आवेदन देना होगा। इसके लिए कुछ अहम डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ती है:

  • वाहन की ओरिजिनल RC
  • Form 29, जिसमें खरीदार का पासपोर्ट साइज फोटो और साइन जरूरी
  • पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज

Form 29 को आप RTO की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

राज्य के भीतर और बाहर RC ट्रांसफर का नियम

भारत में RC ट्रांसफर प्रक्रिया दो हिस्सों में बंटी होती है:

  • राज्य के भीतर RC ट्रांसफर: जब गाड़ी उसी राज्य में खरीदी और बेची जाती है
  • अंतरराज्यीय RC ट्रांसफर: जब गाड़ी एक राज्य से दूसरे राज्य में बेची जाती है

दोनों ही मामलों में प्रक्रिया अलग होती है और दस्तावेजों की जांच के बाद ही ट्रांसफर पूरा किया जाता है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प

आज कई राज्यों में RTO ने RC ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन सुविधा भी शुरू कर दी है। ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और फीस जमा करना शामिल होता है। वहीं, ऑफलाइन प्रक्रिया में RTO जाकर फॉर्म और दस्तावेज जमा करने होते हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद RC नए मालिक के नाम जारी कर दी जाती है।

RC ट्रांसफर के बाद आप बने असली मालिक

एक बार RC आपके नाम ट्रांसफर हो जाने के बाद आप कानूनी रूप से वाहन के मालिक बन जाते हैं। इससे भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।

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