सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले ज़रूर जानें ये बातें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
Used Car Buying Tips: नई कारों का बाजार बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से सेकंड हैंड कारों की डिमांड भी बढ़ी है। जो लोग नई कार का बजट नहीं जुटा पाते, उनके लिए सेकंड हैंड कार एक बेहतरीन विकल्प होगा।
- Written By: सिमरन सिंह
Second Hand Car जो होगी आपके लिए सही। (सौ. Pixabay)
Second Hand Car Buying Tips: भारत में जितनी तेजी से नई कारों का बाजार बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से सेकंड हैंड कारों (Used Cars) की डिमांड भी बढ़ी है। जो लोग नई कार का बजट नहीं जुटा पाते, उनके लिए सेकंड हैंड कार एक बेहतरीन विकल्प बन चुकी है। आज लोकल डीलरशिप से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पर सेकंड हैंड कारों का विशाल स्टॉक उपलब्ध है, जहां लोग अपने बजट और पसंद के अनुसार कार चुन सकते हैं। लेकिन किसी भी सेकंड हैंड कार को खरीदने से पहले कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वरना सस्ती डील महंगी पड़ सकती है।
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कार का सर्विस और टेक्निकल रिकॉर्ड जांचें
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले उसका पूरा सर्विस रिकॉर्ड अवश्य देखें। कई बार डीलर कार को कम चला हुआ दिखाने के लिए ओडोमीटर (मीटर) से छेड़छाड़ करते हैं। इससे इंजन की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता और खरीदारी के बाद इंजन की खराबी के चलते हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इसलिए हर हाल में कार की सर्विस हिस्ट्री और टेक्निकल चेकअप करवाएं।
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इंजन हेल्थ की अच्छी तरह करें जांच
“हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती।” डीलर अक्सर इंजन को चमका कर ग्राहकों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि इंजन अंदर से भी उतना ही फिट हो। इसलिए एक एक्सपर्ट मैकेनिक से इंजन की जांच जरूर करवाएं। कई बार छोटी दिखने वाली खराबी इंजन की गहरी समस्या बन सकती है।
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टायर की स्थिति पर ध्यान दें
कार की सेफ्टी और माइलेज दोनों का सीधा संबंध टायरों से होता है। सेकंड हैंड कारों के टायर अक्सर घिसे हुए होते हैं, जिन्हें बदलवाने में ₹15,000 से ₹20,000 तक खर्च आ सकता है। अगर टायर पुराने हैं या गंजे हो चुके हैं, तो डील करने से पहले कार मालिक से उन्हें बदलवाने की शर्त रखें।
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चमकते पेंट से धोखा न खाएं
पुरानी कारों को नया दिखाने के लिए कई डीलर उन्हें रीपेंट करवा देते हैं। रीपेंट आमतौर पर दो स्थितियों में किया जाता है या तो कार एक्सीडेंट में डैमेज हुई हो या उसकी बॉडी पर जंग लगना शुरू हो गया हो। इसलिए गाड़ी के दरवाजों की रबड़ और टेलगेट के अंदरूनी हिस्से की जांच कर पता लगाएं कि कार को दोबारा पेंट किया गया है या नहीं।
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सर्टिफाइड कार ही खरीदें
कम कीमत के लालच में नकली डील से बचें। हमेशा किसी सर्टिफाइड डीलरशिप या ब्रांडेड आउटलेट से कार खरीदें, जहां इंजन वारंटी और ऑरिजिनल डिटेल्स की गारंटी मिले। आजकल मारुति सुजुकी, महिंद्रा जैसी कंपनियों के अपने सेकंड हैंड कार आउटलेट्स हैं, जो भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।
ध्यान दें
सेकंड हैंड कार खरीदना समझदारी का फैसला तभी बनता है जब आप सतर्क रहें और हर पहलू की जांच करें। थोड़ी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।
