GST और स्क्रैपेज पॉलिसी से ऑटो सेक्टर को बड़ी राहत, नितिन गडकरी ने दिया नया मंत्र
India Scrappage Policy: GST Reform से सबसे बड़ा फायदा ऑटो सेक्टर को मिलने वाला है। कई कंपनियों ने गाड़ियों की कीमतें घटाने का ऐलान किया है। जिसका फायदा सभी ग्राहकों को मिलेगा।
- Written By: सिमरन सिंह
GST से Automobile को फायदा। (सौ. Design)
Nitin Gadkari Auto Sector: जानकारों का मानना है कि GST Reform से सबसे बड़ा फायदा ऑटो सेक्टर को मिलने वाला है। यही कारण है कि कई कंपनियों ने गाड़ियों की कीमतें घटाने का ऐलान किया है। इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश को कमाई का नया मंत्र दिया और ऑटो उद्योग को बड़ा संदेश भी दिया। उनका कहना है कि यदि भारत की सभी 97 लाख अनफिट और प्रदूषणकारी गाड़ियों को स्क्रैप कर दिया जाए, तो देश को जीएसटी से करीब 40,000 करोड़ रुपये का लाभ मिल सकता है।
स्क्रैपिंग की मौजूदा स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक भारत में सिर्फ 3 लाख वाहन स्क्रैप किए गए हैं, जिनमें से 1.41 लाख सरकारी वाहन थे। हर महीने औसतन 16,830 गाड़ियां स्क्रैप हो रही हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर ने इस इकोसिस्टम को तैयार करने के लिए अब तक 2,700 करोड़ रुपये का निवेश किया है। भारत की वाहन स्क्रैपिंग नीति, जिसे वॉलेंटरी व्हीकल फ्लीट मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (V-VMP) कहा जाता है, का उद्देश्य पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है।
ऑटो इंडस्ट्री को गडकरी का संदेश
गडकरी ने ऑटो कंपनियों से अपील की कि वे स्क्रैपेज सर्टिफिकेट दिखाने वाले ग्राहकों को कम से कम 5% की छूट दें। उन्होंने कहा, “यह दान नहीं है, बल्कि इससे मांग बढ़ेगी। स्क्रैपिंग और रिप्लेसमेंट का साइकिल इंडस्ट्री को मजबूत बनाए रखेगा।”
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क्यों जरूरी है स्क्रैपिंग
गडकरी के अनुसार, स्क्रैपिंग से ऑटो पार्ट्स की लागत में 25% तक कमी आ सकती है, क्योंकि रीसाइक्लिंग से स्टील, एल्युमीनियम और अन्य सामग्री फिर से सप्लाई चेन में लौटेगी। इसके अलावा, 97 लाख पुराने वाहनों को हटाने से उत्सर्जन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा।
भारत की ग्लोबल महत्वाकांक्षा
फिलहाल भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर 22 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि चीन 47 लाख करोड़ और अमेरिका 78 लाख करोड़ रुपये पर है। गडकरी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि अगले पांच वर्षों में भारत दुनिया की नंबर वन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बनेगा।”
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ईंधन आयात और ऊर्जा सुरक्षा
भारत सालाना 22 लाख करोड़ रुपये कच्चे तेल के आयात पर खर्च करता है। गडकरी ने इसे असंवहनीय बताते हुए कहा कि देश को ऊर्जा में कृषि से विकल्प तलाशने होंगे। उन्होंने गन्ने और चावल जैसी फसलों से इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। भारत पहले ही E20 से E27 मिश्रण की ओर बढ़ रहा है।
रोड सेफ्टी और भविष्य की दिशा
2023 में भारत में 5 लाख दुर्घटनाएं और 1.8 लाख मौतें दर्ज हुईं, जिनमें ज्यादातर युवा शामिल थे। गडकरी ने स्क्रैपिंग, ईंधन नीति और सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। उन्होंने बताया कि फिलहाल ARAI E27 फ्यूल टेस्टिंग कर रहा है। मंजूरी मिलने पर यह प्रस्ताव मंत्रालय और कैबिनेट के पास जाएगा। अगर स्क्रैपिंग अभियान और इथेनॉल नीति को साथ मिलाकर आगे बढ़ाया गया, तो भारत न केवल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में नया मुकाम हासिल करेगा, बल्कि प्रदूषण घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ाएगा।
