

8 से 14 नवंबर तक के प्रमुख व्रत और त्योहार
दीपावली, महालक्ष्मी पूजन और गोवर्धन पूजा की तिथियां
12 और 14 नवंबर को ग्रहों की बदलती चाल
सोना-चांदी और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर असर
छठ व्रत नियम और विनायकी गणेश चतुर्थी का महत्व
Weekly Festival And Vrat List November 2026: ज्योतिषाचार्य प्रियंका नारायणशंकर व्यास के अनुसार, 8 से 14 नवंबर 2026 तक का यह सप्ताह धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है। इस सप्ताह में सनातन परंपरा के सबसे बड़े पर्व दीपावली से लेकर गोवर्धन पूजा, भाई दूज और महापर्व छठ के नियमों की शुरुआत हो रही है। इसके साथ ही, आकाश मंडल में कई प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन और चाल में बदलाव देखने को मिलेगा। इसका सीधा असर मानव जीवन के साथ-साथ बाजार की कीमतों पर भी पड़ेगा।
इस पूरे सप्ताह सूर्य तुला राशि में, वक्री बुध तुला राशि में, गुरु सिंह राशि में, वक्री शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे। वहीं चंद्रमा तुला, वृश्चिक, धनु और मकर राशि में संचरण करेगा। विशेष बदलावों की बात करें तो मंगल कर्क राशि में रहने के बाद 12 नवंबर को रात 7.10 बजे सिंह राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद 14 नवंबर को सुबह 9.57 बजे वक्री बुध मार्गी होगा और उसी दिन रात 7.20 बजे कन्या राशि में स्थित वक्री शुक्र भी मार्गी हो जाएगा।
ग्रहों के इस बड़े राशि परिवर्तन का असर व्यापारिक बाजारों पर साफ दिखाई देगा। 12 नवंबर को सिंह राशि में मघा नक्षत्र के अंतर्गत मंगल के प्रवेश प्रभाव से सोना, चांदी, तांबा, लोहा, पीतल, गुड़, खांड, शक्कर, रूई, लाल मिर्च, अलसी और लाल वस्त्रों के दामों में तेजी आने की संभावना है। वहीं 14 नवंबर को बुध और शुक्र के मार्गी होने से घी, शक्कर और अलसी में तेजी देखने को मिलेगी, जबकि रूई, चांदी और चावल के भाव में मंदी आने के संकेत हैं।
धार्मिक दृष्टि से 8 नवंबर (रविवार) को मतांतरे नरक चौदस, दीपावली, श्री महालक्ष्मी-कुबेर पूजन तथा स्नान-दान श्राद्ध अमावस्या का पावन पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद 10 नवंबर (मंगलवार) को बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा और यम द्वितीया का पर्व रहेगा। सप्ताह के उत्तरार्ध में 13 नवंबर (शुक्रवार) को विनायकी गणेश चतुर्थी व्रत, दूर्वा गणपति व्रत के साथ महापर्व छठ व्रत के नियमों का प्रारंभ होगा। अंत में 14 नवंबर (शनिवार) को पाण्डव पंचमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।
8 नवंबर (रविवार) - मतांतरे नरक चौदस, दीपावली, श्री महालक्ष्मी कुबेर पूजन, स्नान-दान श्राद्ध अमावस्या: इस दिन धन, वैभव और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी व कुबेर देव का पूजन किया जाता है तथा स्नान-दान का विशेष महत्व है।
10 नवंबर (मंगलवार) - बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा, यम द्वितीया: इस दिन प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए गोवर्धन पूजा, भाई-बहन के प्रेम का पर्व भाई दूज और भगवान चित्रगुप्त का पूजन किया जाता है।
13 नवंबर (शुक्रवार) - विनायकी गणेश चतुर्थी व्रत, दूर्वा गणपति व्रत, छठ व्रत नियम प्रारंभ: यह दिन भगवान श्री गणेश की आराधना और महापर्व छठ के कड़े नियमों व अनुष्ठान की शुरुआत का दिन है।
14 नवंबर (शनिवार) - पाण्डव पंचमी: इस दिन पांडवों की भक्ति और धर्म मार्ग पर चलने की निष्ठा को याद करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।