ब्रिक्स समिट 2024 (सौ.सोशल मीडिया) 
विदेश

ब्रिक्स में शामिल होने को लेकर दुविधा में क्यों हैं सऊदी, जानिए इसके पीछे की वजह

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की चर्चाएं चल रही है जो सम्मेलन रूस के कजान शहर में आयोजित किया गया है।इस सम्मेलन में सऊदी अरब की उपस्थिति पर संदेह बना हुआ है इसके पीछे क्या वजह है कि देश इस सम्मेलन में अब तक नहीं पहुंच पा रहा है।

दीपिका पाल

BRICS 2024: दुनिया में इन दिनों ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की चर्चाएं चल रही है जो सम्मेलन रूस के कजान शहर में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे हैं तो वहीं पर अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की है। इस सम्मेलन में सऊदी अरब की उपस्थिति पर संदेह बना हुआ है इसके पीछे क्या वजह है कि देश इस सम्मेलन में अब तक नहीं पहुंच पा रहा है।

आखिर क्या सोच रहा है सऊदी अरब

यहां पर बताते चलें कि, ब्रिक्स (BRICS) के मूल सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का नाम आता है इसमें साल 2023 की बात की जाए तो, नए देशों की श्रेणी में सऊदी अरब को भी शामिल किया था। फरवरी 2024 में नए देशों के लिए सदस्यता कार्यक्रम चलाए जा रहे थे उस दौरान सऊदी ने आखिरी समय में कहा था कि, वह समिट का हिस्सा अभी नहीं होगा। वहीं पर 2024 में हो रहे इस ब्रिक्स सम्मेलन में भी सऊदी अरब को अपनी उपस्थिति दर्ज कराना था लेकिन उसने शामिल होने वाले निमंत्रण को विचारधीन कर रखा हैं जो इस सम्मेलन में नहीं पहुंच रहा है।

क्या यह हैं नहीं आने की वजह

सऊदी अरब ने ब्रिक्स को लेकर भलें ही कोई विचार नहीं किया है लेकिन कहा जा रहा है कि, ब्रिक्स ग्रुप को पश्चिमी देशों के समूहों के प्रतिद्वंद्वी और ईरान-उत्तर कोरिया के साथ दुनिया में एक बिल्कुल नई विश्व व्यवस्था को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही विश्व व्यवस्था के आधार पर रूस और चीन के गठबंधन के प्रयास सामने आ रहे है। इसे लेकर सऊदी अरब का मानना है कि, सऊदी अरब अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी देश रहा है, इसीलिए उसे रूस-चीन के साथ जुड़ाव बढ़ाने से होने वाले खतरे का आभास है।

प्रधानमंत्री मोदी ने की शिरकत

यहां पर बात करें तो, रूस में हो रहे ब्रिक्स के आयोजन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया है। जिनके स्वागत में रूसी नागरिकों समेत भारतीय मूल के लोग पहुंचे थे।

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