Mandarin Global Language Billionaires Children: अगर आप से कोई कहे कि आने वाले समय में अंग्रेजी की जगह चीन की मैंडरिन भाषा ग्लोबल लैंग्वेज होगी, तो शायद आप इसे नकार दें। लेकिन दुनिया के बड़े राजनेता और अरबपति इसे नहीं नकार रहें हैं। इसका सबूत यह है कि चाहे वो काई मैडिसन ट्रंप या फिर एलन मस्क का 6 साल का बेटा ये सभी बचपन से ही मैंडरिन सीख रहें हैं।
जानकारों का मानना है कि राजनेता और अरबपति अपने बच्चों को मैंडरिन केवल शौक के लिए नहीं सीखा रहे हैं, बल्कि इसके तार उनके बिजनेस से लेकर ग्लोबल पावर से जुड़े हैं। अमेरिकन न्यूज वेबसाइट ABC News ने हाल ही इसे लेकर अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें दावा किया गया है कि अरबपतियों में अपने बच्चों, पोते-पोतियों को मैंडरिन सीखाने की ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसके पीछे तर्क किया गया है कि वो ऐसा सिर्फ इसलिए कर रहें हैं क्योंकि मैंडरिन सीखने से बच्चों का दिमाग तेज होता है। तो आइए इसी बहाने आपको बताते हैं कि अरबपतियों के ऐसा करने के पीछा असली कारण क्या? क्या सच में मैंडरिन से दिमाग तेज होता है?
अपने बच्चों मैंडरिन सीखने वाले अरबपतियों की लिस्ट लंबी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया को बता चुके हैं कि उनकी बेटी इवांका की बेटी अरेबेला मैंडरिन ट्रंप भाषा सीख रही है। यहां तक कि उनकी बेटी को भी यह भाषा अच्छे से आती है। इसी तरह कभी ट्रंप को सहयोगी रहे अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क अपने बेटे X Æ A-Xii को चीनी भाषा सीखा रहे हैं।
ट्रंप और एलन मस्क की तरह अमेजन के मालिक जेफ बेजोस और मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग अपने बच्चों की मैंडरिन सिखा रहे हैं। यहां तक कि इस लिस्ट में इंग्लैड के शाही परिवार के बच्चे भी यह भाषा सीख रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस विलियम के बेटे प्रिंस जॉर्ज अपने स्कूल में चीनी भाषा की क्लास लेते हैं। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी अपनी पोती को मैंडरिन सीखा रहे हैं। ऐसे में ये हो ही नहीं सकता था कि लोगों इस ओर न जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र से मैंडरिन सीखने के कई संभावित लाभ हो सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्कूलों और बहुसांस्कृतिक वातावरण में संवाद आसान हो सकता है। साथ ही, चीन की व्यावसायिक संस्कृति और सामाजिक संबंधों की अवधारणा, जिसे 'गुआंशी' कहा जाता है, को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिल सकती है। भविष्य में व्यापार, निवेश और कूटनीति से जुड़े क्षेत्रों में यह कौशल अतिरिक्त लाभ दे सकता है।
बिजनेस और डिप्लोमेसी में फायदा: विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में व्यापार, निवेश और कूटनीति जैसे क्षेत्रों में चीनी भाषा का ज्ञान संवाद को आसान बना सकता है और पेशेवर अवसरों को बढ़ा सकता है।खास नेटवर्क में प्रवेश: मैंडरिन जानने वाले बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्कूलों और वैश्विक पेशेवर माहौल में दूसरे अमीर चीनी बच्चों से असानी से घुल मिल जाते हैं। आगे चलकर जब वो अपने माता-पिता की विरासत संभालेंगे तब यह दोस्ती बेहद काम आ सकती है।चीन की व्यावसायिक संस्कृति की समझ: भाषा सीखने से चीन की कारोबारी संस्कृति और रिश्तों पर आधारित अवधारणा 'गुआंशी' को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है।
इस सवाल के जवाब को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। एक तरफ जहां चीन का आर्थिक प्रभाव मैंडरिन के महत्व को बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी अभी भी विज्ञान, तकनीक, प्रोग्रामिंग, वैश्विक व्यापार और उच्च शिक्षा की प्रमुख भाषा बनी हुई है। मैंडरिन सीखने को दूसरी भाषाओं की तुलना में अधिक मुश्किल माना जाता है। क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में चीनी अक्षर (कैरेक्टर) होते हैं और पढ़ने-लिखने के लिए हजारों सामान्य उपयोग वाले कैरेक्टर सीखने पड़ते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में अंग्रेज़ी का स्थान लेना आसान नहीं होगा, हालांकि वैश्विक स्तर पर मैंडरिन का महत्व लगातार बढ़ सकता है।
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हिंदी की बात करें तो दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। भारत में हिंदी भाषियों की बढ़ती संख्या और देश की जनसंख्या वृद्धि के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की दुनिया बहुभाषी होगी, जहां अंग्रेज़ी, मैंडरिन और हिंदी जैसी प्रमुख भाषाएं समानांतर रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।