Venezuela Earthquake News In Hindi: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है कि चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और मलबे का ढेर नजर आ रहा है। बुधवार को आए दो विनाशकारी भूकंपों के बाद मलबे से लगातार लाशें मिलने का सिलसिला जारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण आपदा में अब तक 1,430 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 3,238 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं, लेकिन मलबे में दबे हजारों लोगों की वजह से मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की आशंका है।
वेनेजुएला के लोग अभी बुधवार की तबाही से उबरे भी नहीं थे कि रविवार सुबह फिर से तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई है। इसका केंद्र एल लिमोन शहर से लगभग 30 किमी उत्तर-पूर्व में था।
इससे पहले शनिवार को भी 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने लोगों को घरों से बाहर भागने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं, जिससे कमजोर हो चुकी इमारतें गिर सकती हैं।
तबाही का सबसे खौफनाक मंजर 'ला-गुएरा' इलाके में दिख रहा है, जहां सैकड़ों इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो दिल दहला देने वाले हैं, जिनमें एक बुजुर्ग मां अपने हाथ से मलबा हटाकर अपने बेटे को तलाश रही है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और अस्पतालों में घायलों के पैर रखने की जगह नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भारी मशीनरी और सरकारी मदद की कमी के कारण बचाव कार्य में देरी हो रही है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुमान के मुताबिक, इस आपदा से वेनेजुएला को करीब 6.7 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। आपदा की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय मदद के लिए आगे आया है। शनिवार को करीब 1,600 विदेशी बचावकर्मी वेनेजुएला पहुंचे और जल्द ही 10 अन्य देशों की टीमें भी इस मिशन में शामिल होने वाली हैं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 14,000 सैन्य और पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। USGS के मुताबिक, जिस तरह की तबाही हुई है, उसे देखते हुए मृतकों की संख्या 10,000 के पार जा सकती है।
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यदि ऐसा होता है, तो यह पिछले एक सदी में लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक होगी। देश में भ्रष्टाचार की खबरों ने भी इस आपदा के प्रभाव को और अधिक भयावह बना दिया है, जिससे राहत कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।