डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ग्रीनलैंड बनेगा अमेरिका का हिस्सा! डोनाल्ड ट्रपं ने नहीं मानी डेनमार्क की बात, बोले- चीन-रूस के सामने...

US Greenland Dispute: ग्रीनलैंड संकट बरकरार है; व्हाइट हाउस बैठक बेनतीजा रही. ट्रंप के बयानों से विवाद बढ़ा, जबकि डेनमार्क-ग्रीनलैंड ने संप्रभुता और सहयोग पर जोर दिया।

अक्षय साहू

US Denmark Greenland Meeting:  ग्रीनलैंड को लेकर पैदा हुआ अंतरराष्ट्रीय संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है और हालिया घटनाक्रम ने इसे और मुश्किल बना दिया है। व्हाइट हाउस में अमेरिका, ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष नेताओं के बीच हुई अहम बैठक से कोई ठोस या निर्णायक नतीजा सामने नहीं आया। इसके उलट, बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बार फिर दिए गए विवादित बयानों ने इस संवेदनशील मुद्दे को और भड़का दिया।

बुधवार को ग्रीनलैंड और डेनमार्क के विदेश मंत्री व्हाइट हाउस पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में ग्रीनलैंड के भविष्य, आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़े बयानों पर विस्तार से चर्चा की गई। डेनमार्क ने, जिसके अधीन ग्रीनलैंड एक स्वशासित क्षेत्र है, अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की संप्रभु स्थिति पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

क्या अमेरिका का हिस्सा बनेगा ग्रीनलैंड?

बैठक के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड ने अपनी सीमाएं और प्राथमिकताएं तय कर ली हैं और सभी संबंधित पक्षों के हित में यही होगा कि इस मुद्दे का कोई संतुलित और सम्मानजनक समाधान निकाला जाए।

वहीं, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने बताया कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने मिलकर एक हाईलेवल वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है। यह समूह भविष्य की रणनीति, सुरक्षा सहयोग और संभावित साझा समाधान पर काम करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ अब भी मूलभूत मतभेद बने हुए हैं।

रासमुसेन ने दोहराया कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है और इसी आधार पर तीनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर खुलकर चर्चा हुई। उनके अनुसार, फिलहाल चीन या रूस की ओर से ऐसा कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, जिससे डेनमार्क निपट न सके।

ट्रंप का पलटवार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक में शामिल नहीं थे और वे एक अलग कार्यक्रम में मौजूद थे। वहां उनसे जब ग्रीनलैंड और डेनमार्क के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। ट्रंप ने दावा किया कि यदि रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं तो डेनमार्क प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे पाएगा, जबकि अमेरिका ऐसा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि वह केवल इस भरोसे पर नहीं रह सकते कि डेनमार्क अपनी सुरक्षा खुद कर लेगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और डेनमार्क के रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है। इससे पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर भी सख्त रुख अपनाते हुए लिखा कि ग्रीनलैंड के बिना अमेरिका का ‘गोल्डन डोम’ से जुड़ा लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता और इससे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है।

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