HIGHLIGHTS
मिडटर्म चुनाव का अंतिम परिणाम जारी होने में वक्त लगेगा
चुनाव कराने की जिम्मेदारी वहां के प्रशासन की होती है
वोटों की काउंटिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर का उपयोग होता है
छोटी-मोटी कमियों को सुधारने के लिए 'क्योरिंग' होती है
फिर वोटों की कुल संख्या और परिणाम बैचों में घोषित होते हैं
Difference Between House And Senate In US: सबसे पहले अमेरिका की राजनीति को जरा गौर से समझिए। जैसे भारत में पार्लियामेंट के 2 सदन होते हैं- राज्यसभा और लोकसभा। ठीक वैसे ही, अमेरिका की पार्लियामेंट को कांग्रेस के नाम से जाना जाता है और इसके भी 2 सदन होते हैं- निचला सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और ऊपरी सदन सीनेट कहलाता है।
यहां हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स नियम और कानून बनाने, सरकारी खर्च और टैक्स से जुड़े फैसले लेता है। वहीं ऊपरी सदन सीनेट कानूनों को मंजूरी देने, महत्वपूर्ण सरकारी नियुक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संधियों से जुड़े फैसलों में खास भूमिका निभाता है। ऐसे में कोई भी कानून बनाने के लिए दोनों सदनों से मंजूरी लेनी पड़ती है और फिर राष्ट्रपति द्वारा इसे पारित किया जाता है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी को 218 सीटें जीतनी होती हैं. वहीं, सीनेट में स्पष्ट बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी हैं। बता दें कि शुरुआती नतीजों से जीत की तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी, क्योंकि ये उन राज्यों से आएंगे जहां रिपब्लिकन पार्टी (केंटकी और इंडियाना) या डेमोक्रेटिक पार्टी (वर्मॉन्ट) की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि यदि सीनेट में दोनों पार्टियों के पास 50-50 सीटें होती हैं, तो उपराष्ट्रपति को बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है। इससे उनकी पार्टी को सीनेट पर नियंत्रण मिल जाता है।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी (GOP) और डेमोक्रेटिक पार्टी दो मुख्य राजनीतिक पार्टियां में गिने जाते हैं। ये दोनों पार्टियां मिलकर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों का चुनाव लड़ती हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर 4 साल में होता है। उसके बीच में यानी 2 साल बाद कांग्रेस का चुनाव होता है। इस बार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 435 सीटों के लिए चुनाव है वहीं सीनेटकी 33 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। लेकिन शुरुआती नतीजों से पूरे चुनाव की तस्वीर साफ नहीं हो पाएगी क्योंकि ये उन राज्यों से आएंगे जहां रिपब्लिकन पार्टी (केंटकी और इंडियाना) या डेमोक्रेटिक पार्टी (वर्मॉन्ट) की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
चुनाव के पूरे नतीजे आने में कितना समय लगेगा, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि मुकाबला कितना कड़ा है और किन सीटों के नतीजे निर्णायक साबित होते हैं। इसमें कुछ घंटे या दिन भी लग सकते हैं। उदाहरण के लिए- पिछले चुनावों में प्रतिनिधि सभा यानी House of Representatives का नियंत्रण तय होने में करीब 8 से 16 दिन तक का समय लग गया था।
अमेरिका के हर राज्य में चुनाव कराने की जिम्मेदारी वहां के प्रशासन की होती है। हर राज्य में वोटों की गिनती के अलग नियम हैं। अधिकतर मतदान केंद्रों पर वोटों की गिनती के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर का उपयोग किया जाता है जो पेपर बैलेट को स्कैन करते हैं।
कुछ जगहों पर हाथों से भी वोटों की गिनती की जाती है। इस दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इस्तेमाल होने वाली मशीनों को इंटरनेट से कनेक्ट नहीं किया जाए और सुरक्षा के लिए इनमें टैम्पर-इविडेंट सील भी लगाई जाती है।
चुनाव में तैनात कर्मचारी डाक से आए मतपत्रों का सत्यापन भी करते हैं। कई राज्यों में हस्ताक्षर या अन्य जानकारियों से जुड़ी छोटी-मोटी कमियों को सुधारने के लिए 'क्योरिंग' (Curing) नामक प्रक्रिया की जाती है। जिसके बाद वोटों की कुल संख्या और परिणाम बैचों में घोषित कर दिए जाते हैं।