सांकेतिक फोटो (सो, सोशल मीडिया) 
विदेश

H-1B वीजा पर 3 साल की रोक? ट्रंप के सांसदों का नया दांव, भारतीय IT सेक्टर में मची खलबली!

US H1B Visa: अमेरिकी कांग्रेस में H-1B वीजा पर 3 साल की रोक लगाने वाला 'एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट' पेश किया गया है। इसके तहत वीजा संख्या घटाने और सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव है।

अमन उपाध्याय

US H1B Visa Policy Changes: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में एच-1बी (H-1B) वीजा कार्यक्रम पर तीन साल तक पूरी तरह रोक लगाने की मांग करने वाला एक कड़ा विधेयक पेश किया गया है।

इस विधेयक को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद एली क्रेन द्वारा पेश किया गया है। 'एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026' (End H-1B Visa Abuse Act of 2026) नामक इस बिल को सात अन्य रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन प्राप्त है।,

वीजा नियमों में आमूल-चूल बदलाव का प्रस्ताव

सांसद एली क्रेन द्वारा पेश किए गए इस बिल में केवल रोक की बात ही नहीं है, बल्कि एच-1बी कार्यक्रम के ढांचे को पूरी तरह बदलने के कई सख्त प्रस्ताव शामिल हैं। विधेयक के अनुसार, वर्तमान में एच-1बी वीजा की वार्षिक सीमा 65,000 है, जिसे घटाकर केवल 25,000 करने की मांग की गई है। इसके अलावा, वीजा धारकों के लिए न्यूनतम वार्षिक वेतन की सीमा को बढ़ाकर 2,00,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.67 करोड़ रुपये) निर्धारित करने का प्रस्ताव है। सबसे बड़ा झटका उन परिवारों के लिए है जो अमेरिका में साथ रहना चाहते हैं क्योंकि इस बिल में एच-1बी वीजा धारकों को अपने आश्रितों (Dependents) को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं देने का प्रावधान है।

भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

इस बिल का सबसे सीधा और नकारात्मक प्रभाव भारतीय कार्यबल पर पड़ने की आशंका है। वर्तमान में, अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने के लिए इसी प्रोग्राम का उपयोग करती हैं, और भारतीय पेशेवर विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर सेक्टर में सबसे ज्यादा वीजा हासिल करते हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत, अब नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उन्हें कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, Third-party भर्ती एजेंसियों के माध्यम से रोजगार देने और एच-1बी कर्मचारियों को एक से ज्यादा नौकरियां करने से रोकने का भी प्रावधान है।

छात्रों और अन्य वीजा श्रेणियों के लिए नई

शर्तें यह विधेयक केवल अनुभवी पेशेवरों को ही नहीं बल्कि वहां पढ़ रहे छात्रों को भी प्रभावित करेगा। इसमें 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, गैर-प्रवासियों को किसी दूसरी वीजा श्रेणी में जाने से पहले अनिवार्य रूप से अमेरिका छोड़ना होगा।

क्यों लाया गया यह कड़ा कानून?

विधेयक पेश करने वाले सांसदों का तर्क है कि मौजूदा सिस्टम का दुरुपयोग अमेरिकी कामगारों के स्थान पर सस्ते विदेशी श्रम को लाने के लिए किया जा रहा है। सांसद पॉल गोसर के अनुसार, यह विधेयक उस व्यवस्था पर अंकुश लगाएगा जो अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।

वहीं एली क्रेन का कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी बड़ी कंपनियों के मुनाफे के बजाय अपने मेहनती नागरिकों के प्रति होनी चाहिए। इमिग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस के पास किसी भी वीजा श्रेणी को फ्रीज करने का अधिकार है, और यदि यह बिल पारित होता है तो प्रशासन को इसे लागू करना ही होगा। फिलहाल, इस बिल ने वैश्विक स्तर पर विशेषकर भारत के आईटी सेक्टर में खलबली मचा दी है।

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