अमेरिकी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

भारत पर 100% टैरिफ का मंडराया खतरा, अमेरिकी सलाहकार पीटर नवारो ने बताया कैसे सुलझेगा मसला

Graham Bill Tariffs: लिंडसे ग्राहम बिल के जरिए भारत पर 100% टैरिफ लगाने की अमेरिकी धमकी के बीच पीटर नवारो ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति से इसका समाधान निकाल लेंगे।

प्रिया सिंह

US Graham Bill Tariff Threat: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के 100% टैरिफ वाले कड़े विधेयक को लेकर अमेरिकी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस विधेयक से भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ने वाले प्रतिकूल आर्थिक और कूटनीतिक प्रभावों की समीक्षा की है।

नवारो ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच बने मजबूत संबंधों के चलते इस विवाद का शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है, जिससे किसी भी मतभेद को आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाएगा।

विधेयक का मुख्य उद्देश्य और 100% टैरिफ

उल्लेखनीय है कि यह अमेरिकी विधेयक उन देशों पर 100% तक का भारी आर्थिक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव करता है, जो रूस से ऊर्जा संसाधनों का आयात करते हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस के रक्षा औद्योगिक ढांचे को मिलने वाले वैश्विक वित्तीय सहयोग को पूरी तरह रोकना है।

विधेयक के तहत रूसी तेल और गैस आयात करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिससे भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन नवारो ने साफ किया है कि दोनों देशों के बीच वार्ताओं और व्यक्तिगत कूटनीति से जल्द समाधान ढूंढ लिया जाएगा।

मोदी और ट्रंप के मजबूत कूटनीतिक संबंध

नवारो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के बेहद मजबूत कामकाजी संबंधों की विशेष रूप से प्रशंसा की है। उनका मानना है कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच की आपसी समझ और कूटनीतिक कूटनीति किसी भी बड़े विवाद को हल करने में अहम भूमिका निभाएगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रूस से आयात

इस विवाद के बीच भारतीय अधिकारियों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और विकास की आवश्यकताओं से कोई समझौता नहीं करेंगे। भारत अपनी विशाल आबादी के लिए ऊर्जा की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रूस समेत कई अन्य देशों से तेल आयात करता आ रहा है।

भावी वार्ताएं और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद

हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग का मानना है कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने के लिए सभी देशों को कड़े कदम उठाने होंगे। लेकिन इस विधायी दबाव के बावजूद दोनों देशों के राजनयिकों के बीच बातचीत जारी है, जिससे एक व्यावहारिक समझौता होने की पूरी उम्मीद है।

अब देखना होगा कि आगामी दिनों में इस प्रस्तावित विधेयक पर अमेरिकी कांग्रेस क्या अंतिम निर्णय लेती है और भारत इस पर क्या रणनीति अपनाता है। दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंध दर्शाते हैं कि वे आपसी हितों की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने में सक्षम हैं।

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