

Hormuz Strait Control Global Threat: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को ईरान को लेकर एक बहुत ही गंभीर चेतावनी दुनिया के सामने दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया तो यह एक बहुत खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उनका यह भी कहना है कि इसका बुरा असर सिर्फ मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं रहेगा। आगे चलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी इसी तरह का खतरनाक प्रभाव आसानी से देखने को मिल सकता है।
मनीला में आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए रुबियो ने अपनी बात बहुत ही मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के एक बेहद अहम सिद्धांत के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। यह मामला सिर्फ एक क्षेत्रीय तनाव का नहीं है, बल्कि समुद्री रास्तों पर आवाजाही और व्यापार व्यवस्था की सुरक्षा का है। एशिया के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर ही निर्भर करती है।
रुबियो ने कहा कि ईरान यह बेजा अधिकार मांग रहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करे। लेकिन मौजूदा किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत ईरान को ऐसा कोई भी अधिकार बिल्कुल प्राप्त नहीं है। यह विवाद सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच का कोई सामान्य आपसी मामला बिल्कुल भी नहीं है। बल्कि यह तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के अहम नियमों की रक्षा का एक बहुत बड़ा सवाल है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट को एक बेहद अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। अगर किसी एक देश को ऐसे अहम रास्ते पर नियंत्रण करने दिया गया, तो नतीजे सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे। कोई देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते पर टैक्स वसूले या भुगतान न करने पर जहाज उड़ा दे, तो यह खतरनाक मिसाल होगी। यही चीज भविष्य में दुनिया के दूसरे हिस्सों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी आसानी से दोहराई जा सकती है।
रुबियो ने जोर देकर कहा कि असली सवाल समुद्री रास्तों पर पूरी आजादी के साथ व्यापारिक आवाजाही का है। अगर इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर जरा भी खतरा पैदा होता है, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। पिछले करीब 150 साल से जिस अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के आधार पर दुनिया का कारोबार चल रहा है, वह खतरे में पड़ जाएगी। अमेरिका इसी खतरे को टालने के लिए और समुद्री सुरक्षा के लिए अपने कड़े प्रयास लगातार कर रहा है।
अमेरिका आज भी ईरान के साथ खुले मन से कूटनीतिक बातचीत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन अमेरिका का सीधा आरोप है कि ईरान ने पहले हुई बातचीत में किए गए अपने वादे बिल्कुल पूरे नहीं किए हैं। रुबियो ने कहा कि हम खुले मन से बातचीत करने और मतभेदों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए तैयार हैं। ईरान ने संपर्क तो किया था लेकिन पहले हुए समझौतों के बावजूद अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन बिल्कुल नहीं किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत चाहता है तो अमेरिका तैयार है। अगर वे इस गंभीर मसले पर बातचीत के लिए पूरी तरह से गंभीर हैं, तो हम भी बिल्कुल गंभीर हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो अमेरिका अपने और अपने सहयोगी देशों के अहम हितों की रक्षा जरूर करेगा। इसके लिए जो भी जरूरी और सख्त कदम उठाने पड़ेंगे, अमेरिका वह हर कदम उठाने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगा।