अमेरिका ने ताइवान को लेकर चीन से सयंम बरतने की अपील की (सोर्स - सोशल मीडिया) 
विदेश

ताइवान मुद्दे पर गरम हुआ अमेरिका, चीन को दे डाली चेतावनी, कहा- एकतरफा बदलाव मंजूर नहीं

China-Taiwan Conflict: अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन की ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियों की आलोचना करते हुए बीजिंग से संयम बरतने और ताइवान पर सैन्य दबाव बंद करने की अपील की है।

अक्षय साहू

US Warn China Over Taiwan: अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन की ताइवान के आसपास की सैन्य गतिविधियों की आलोचना की और बीजिंग से संयम बरतने की अपील की। यह बयान चीन द्वारा ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास के बाद आया, जिसमें मिसाइल लॉन्च और नाकाबंदी जैसी सैन्य कार्रवाइयाँ शामिल थीं। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि इन गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को अनावश्यक रूप से बढ़ा दिया है।

चीन का कहना है कि उसने ताइवान के खिलाफ यह सैन्य अभ्यास ताइवान स्वतंत्रता को लेकर अलगाववादी ताकतों को कड़ी चेतावनी देने के लिए किया। चीनी अधिकारियों ने इसे “जस्टिस मिशन 2025” नामक अभियान बताया और दावा किया कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक था। चीन ने इस सैन्य अभ्यास को ताइवान के खिलाफ एक मजबूत संदेश भेजने के रूप में पेश किया।

अमेरिका ताइवान की रक्षा क्यों करता है?

ताइवान और कई अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य इस सैन्य अभ्यास को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताते हुए कहा कि ताइवान अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 ताइवान के लिए महत्वपूर्ण साल होगा और ताइवान किसी भी सबसे खराब स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेगा।

अमेरिका लंबे समय से ताइवान की रक्षा क्षमता को मजबूत करने का समर्थन करता आया है, हालांकि वह एक चीन नीति का पालन करता है। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने ताइवान को 11 अरब डॉलर के रक्षा पैकेज की मंजूरी दी थी, जिसमें उन्नत मिसाइलें, ड्रोन और अन्य रक्षा प्रणालियाँ शामिल थीं। इस कदम ने बीजिंग को नाराज कर दिया।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन

विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान जलडमरूमध्य क्षेत्रीय तनाव का प्रमुख केंद्र बन चुका है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा चीन ताइवान के मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष के हस्ताक्षेप को पसंद नहीं करता है। यही कारण है कि जब भी कोई देश ताइवान के समीप आता है चीन सैन्य अभ्यास के नाम पर दबाव बनाना शुरु कर देता है।

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