अमेरिका-ईरान जंग में ट्रंप की नई रणनीति, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान के खिलाफ US की नई चाल! ट्रंप भेजेंगे हजारों अमेरिकी सैनिक, क्या अब शुरू होगा जमीनी हमला?

US Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच ट्रंप प्रशासन खाड़ी क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है। 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' के तहत ईरान की सैन्य शक्ति को खत्म करने का लक्ष्य है।

अमन उपाध्याय

US Troops Deployment Iran: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध अब एक नए और अधिक विनाशकारी चरण में प्रवेश कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही अमेरिकी सेना अब अगले कड़े कदमों की तैयारी कर रही है। हालांकि, यह बड़े पैमाने पर तैनाती ट्रंप के उन चुनावी वादों के विपरीत मानी जा रही है, जिनमें उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों के दलदल से दूर रखने की बात कही थी।

क्या है अमेरिका का मास्टर प्लान?

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' के उद्देश्यों को स्पष्ट कर दिया है। इस आक्रामक सैन्य अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना, उसकी नौसेना का सफाया करना और यह गारंटी देना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। इसके साथ ही, अमेरिका यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान के 'आतंकी प्रॉक्सी' क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान न पहुंचा सकें।

खार्ग द्वीप और यूरेनियम केंद्रों पर जमीनी हमले का खतरा

अमेरिकी सैन्य योजनाकारों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या ईरान के तटों या उसके महत्वपूर्ण 'खार्ग द्वीप' पर जमीनी सेना भेजी जानी चाहिए। खार्ग द्वीप ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा संभालता है और इसे कब्जे में लेना ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने जैसा होगा। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि ईरान ड्रोन और मिसाइलों से इस द्वीप की रक्षा करने में सक्षम है। इसके अलावा, ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी विशेष बलों की तैनाती पर भी चर्चा हुई है, जिसे विशेषज्ञ एक अत्यंत जटिल और खतरनाक कार्य मान रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक तेल संकट

अमेरिका का एक प्राथमिक उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना है। इसके लिए हवाई और नौसैनिक बलों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। युद्ध के कारण तेल की कीमतें 200 प्रति बैरल डॉलर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

अब तक के सैन्य प्रहार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका अब तक ईरान पर 7,800 से अधिक हवाई हमले कर चुका है। इन हमलों में ईरान के 120 से अधिक युद्धपोतों और जहाजों को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया जा चुका है। इस आक्रामक नीति के कारण अमेरिका को अपने नाटो सहयोगियों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है।

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