हमले के बाद धुएं उठते हुए। सोर्स: एक्स
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रूस की तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, आसमान में उठे धुएं के गुबार; देखें वीडियो

Ukraine Drone Strike Oil Refinery: यूक्रेन ने रूस के समारा क्षेत्र में नोवोकुयबिशेवस्क तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद भीषण आग लग गई।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • यूक्रेन ने रूस की नोवोकुयबिशेवस्क तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया।

  • हमले के बाद रिफाइनरी में लगी भीषण आग, आसमान में उठा धुएं का गुबार।

  • ट्रंप प्रशासन के दबाव के बाद दो सप्ताह से रुके थे रूसी तेल ठिकानों पर हमले।

Ukraine Drone Strike Russia Oil Refinery:  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन ने शुक्रवार को रूस के समारा क्षेत्र में स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं के ऊंचे गुबार दिखाई देने लगे। खास बात यह है कि रूस की तेल प्रसंस्करण इकाइयों पर यूक्रेन का हमला करीब दो सप्ताह के अंतराल के बाद हुआ है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए यूक्रेन पर रूस की तेल सुविधाओं पर हमले रोकने का दबाव बनाया था। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले यह दबाव बढ़ा था। इसके बाद यूक्रेन ने रूसी तेल प्रतिष्ठानों पर हमले अस्थायी रूप से रोक दिए थे। यह विराम अमेरिकी चुनाव के बाद तक जारी रहने की उम्मीद थी।

ड्रोन हमले के बाद रिफाइनरी में लगी आग

यूक्रेन के ड्रोन ने नोवोकुयबिशेवस्क तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। हमले के बाद वहां आग लग गई। सोशल मीडिया पर सामने आए 16 सेकंड के एक डैशकैम वीडियो में सड़क से गुजरते वाहन के अंदर से रिफाइनरी के पास उठता धुआं दिखाई दे रहा है।

यह रिफाइनरी रूस की सरकारी नियंत्रण वाली तेल कंपनी रोसनेफ्ट के स्वामित्व में है। इस साल अगस्त के बाद यह दूसरी बार है, जब इसे यूक्रेनी ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया है।

हर साल 88 लाख टन कच्चे तेल का होता है प्रसंस्करण

नोवोकुयबिशेवस्क रिफाइनरी में सालाना करीब 88 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण होता है। यहां विमानन ईंधन, पेट्रोल, डीजल, लुब्रिकेंट और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

यूक्रेन लंबे समय से रूस की तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और ऊर्जा ठिकानों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले कर रहा है। इसका मकसद रूसी सेना की ईंधन आपूर्ति बाधित करना और युद्ध के लिए रूस को मिलने वाली आर्थिक कमाई कम करना है।

अगस्त में हुए हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया था कि उनकी सेना ने अग्रिम मोर्चे से करीब 1,000 किलोमीटर दूर स्थित इस रिफाइनरी को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा था कि इससे रूस को निर्यात से होने वाली लाखों डॉलर की कमाई का नुकसान हुआ।

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