Highlights
ब्रिटेन में भारतीय महिला किरण कौर को जल्द रिहाई की उम्मीद।
बेटे की हत्या के बाद हथियार हटाने के मामले में मिली थी 3 साल की सजा।
बेटे विक्रम डिगवा को उम्रकैद, कम से कम 21 साल जेल में रहना होगा।
रिहाई के बाद किरण को भारत निर्वासित करने की कार्रवाई संभव।
मां-बेटे की सजा के खिलाफ अपील पर 5 नवंबर को सुनवाई।
UK Indian Woman Kiran Kaur Deportation Son Murder Case: ब्रिटेन में अपने बेटे द्वारा 18 वर्षीय किशोर की हत्या के बाद वारदात में इस्तेमाल हथियार हटाने के मामले में दोषी ठहराई गई 53 वर्षीय भारतीय महिला किरण कौर को जेल से जल्द रिहाई मिल सकती है। इसके बाद उन्हें भारत प्रत्यर्पित किए जाने की कार्रवाई भी शुरू हो सकती है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने कहा है कि विदेशी अपराधियों को जल्द से जल्द निर्वासित करने की कोशिश की जाएगी।
किरण कौर को जुलाई में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई थी। उनके बेटे विक्रम डिगवा (23) ने 3 दिसंबर 2025 को साउथैम्पटन में 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। विक्रम को जून 2026 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे कम से कम 21 साल जेल में बिताने होंगे, जिसके बाद ही पैरोल पर विचार किया जा सकेगा।
ब्रिटेन की जेलों में बढ़ती भीड़ कम करने के लिए शुरू की गई सरकारी योजना के तहत किरण को निर्धारित अवधि से पहले रिहा किए जाने की संभावना है। हालांकि, रिहाई के बाद उन्हें भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ब्रिटेन के नियमों के अनुसार, 12 महीने या उससे अधिक की सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों को आमतौर पर निर्वासन के लिए विचाराधीन रखा जाता है। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं और फैसले को चुनौती दी जा सकती है।
कृपाण को लेकर उठा विवाद
मामले में विक्रम ने धार्मिक आत्मरक्षा का तर्क देते हुए कहा था कि हत्या में इस्तेमाल हथियार कृपाण था, जिसे सिख धर्म में धार्मिक प्रतीक माना जाता है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को हत्या का औचित्य नहीं माना।
सजा सुनाते हुए न्यायाधीश विलियम मॉस्ले ने कहा कि कृपाण धार्मिक आस्था का प्रतीक है और इसका इस्तेमाल हमला करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने किरण की आलोचना करते हुए कहा कि जिम्मेदार माता-पिता को बेटे के गलत काम पर सवाल उठाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने हथियार घर ले जाकर बेटे के कमरे में रख दिया।
किरण और विक्रम दोनों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की है। ब्रिटेन की अपील अदालत में 5 नवंबर को दोनों मामलों की सुनवाई निर्धारित है।