Top Secret UFO Investigation: व्हाइट हाउस ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। क्या ब्रह्मांड में सचमुच एलियन मौजूद हैं? इस रहस्य को सुलझाने के लिए अमेरिका ने हार्वर्ड के खगोलशास्त्री एवी लोएब की अध्यक्षता में एक नई वैज्ञानिक सलाहकार परिषद बनाई है। यह विशेष टीम उन रहस्यमयी घटनाओं की गहराई से जांच करेगी जिन्हें अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने हाल के वर्षों में आसमान में देखा है।
इस नई समिति का मुख्य उद्देश्य आसमान में दिखने वाली अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं (UFO) का पता लगाना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना के तहत अब एलियन से जुड़े मामलों में ज्यादा पारदर्शिता बरती जाएगी। लोएब की यह टीम पेंटागन के डेटा का विश्लेषण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट व्हाइट हाउस की नई यूएपी समिति को जल्द ही सौंपेगी जिससे सच्चाई सामने आ सके।
एवी लोएब पिछले कई वर्षों से एलियन जीवन की संभावना पर अपना महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। वर्ष 2017 में पृथ्वी के पास से गुजरने वाली एक रहस्यमयी वस्तु को उन्होंने एलियन अंतरिक्ष यान का हिस्सा बताया था। उनके इस बड़े दावे ने उस समय पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन कई वैज्ञानिक उनके इस अजीब दावे से पूरी तरह असहमत थे।
एवी लोएब की इस टीम में एक दर्जन से ज्यादा मशहूर वैज्ञानिकों और यूएफओ शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। इनमें अमेरिकी नेवी के रिटायर्ड रियर एडमिरल टिमोथी गैलोडेट भी हैं, जो पहले गैर-मानवीय बुद्धिमत्ता के दावे कर चुके हैं। अरबपति कारोबारी बेन लैम भी इस अहम टीम का हिस्सा बनकर जांच में अपनी बड़ी भूमिका निभाएंगे।
इस विशेष टीम ने अपनी पहली बैठक के बाद पेंटागन से रहस्यमयी वस्तुओं (UAP) से जुड़े 50 से अधिक वीडियो मांगे हैं। टीम ने कई तस्वीरें और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जांच के लिए मांगे हैं ताकि पूरी सच्चाई दुनिया के सामने आ सके। लोएब का मानना है कि बेहतर डेटा मिलने पर दशकों पुरानी इस एलियन बहस का हमेशा के लिए जवाब मिल सकता है।
पेंटागन के पूर्व प्रमुख शॉन किर्कपैट्रिक का कहना है कि वैज्ञानिक समुदाय में एवी लोएब की छवि थोड़ी विवादित है। उनके पास राष्ट्रीय सुरक्षा का अनुभव नहीं है, जिससे व्हाइट हाउस के इस फैसले पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। फिर भी लोएब का कहना है कि उनका पूरा ध्यान केवल वैज्ञानिक तथ्यों और आसमान में दिखने वाली वस्तुओं पर रहेगा।
एलियन दावों से पहले लोएब लगभग 10 साल तक हार्वर्ड में खगोल विज्ञान विभाग के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 2023 में उनकी टीम ने प्रशांत महासागर से धातु के कुछ छोटे कण निकाले थे। उन्होंने इसे एलियन तकनीक से जुड़ा बताया था जबकि कई अन्य वैज्ञानिकों ने इसे केवल ज्वालामुखीय चट्टान या साधारण कोयले की राख करार दिया था।