तुर्की का झंडा  फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

दशकों पुरानी जंग होगी खत्म! तुर्की ने कुर्द लड़ाकों को सशर्त माफी देने वाले बिल को दी मंजूरी

Kurdish Fighters Amnesty: तुर्की की संसद ने कुर्द लड़ाकों को सशर्त माफी देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिससे दशकों पुराना हिंसक संघर्ष पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद बनी हुई है।

प्रिया सिंह

Turkey Kurdish Fighters Peace Initiative: तुर्की की संसद ने कुर्द लड़ाकों को सशर्त माफी देने से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानून को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के पक्ष में 468 मत पड़े, जबकि विरोध में केवल 88 मत ही पड़े। इसका मुख्य उद्देश्य दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करना है।

संसद द्वारा पास यह ऐतिहासिक कानून तभी लागू होगा जब अधिकारी इसकी पुष्टि कर लेंगे। इसके तहत पीकेके (PKK) को अपने हथियार सौंपने होंगे और संगठन को हमेशा के लिए भंग करना होगा। इस बड़े कदम से खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक स्थिरता की नई शुरुआत होने की पूरी उम्मीद है।

दशकों पुराने हिंसक संघर्ष का अंत

यह ऐतिहासिक विधेयक दशकों पुराने खूनी संघर्ष को समाप्त करने के लिए लाया गया है, जिसमें अब तक 10 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जेल में बंद कुर्द नेता अब्दुल्ला ओचलान की अपील के बाद पीकेके ने सरकार के खिलाफ सशस्त्र अभियान रोकने की घोषणा की थी।

इस नए कानून के तहत गंभीर मामलों को छोड़कर अन्य जांच 5 से 10 साल के लिए स्थगित की जाएगी। अगर इस अवधि में कोई नया अपराध नहीं होता, तो सभी मुकदमे समाप्त कर दिए जाएंगे, जिससे उन्हें मुख्यधारा में लौटने का बड़ा अवसर मिलेगा।

माफी के नियम और एर्दोगन के समीकरण

हालांकि, जानबूझकर की गई हत्याओं के दोषियों और 2005 से पहले आजीवन कारावास पाने वालों को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके तहत पीकेके के शीर्ष नेता अब्दुल्ला ओचलान भी दायरे से बाहर रहेंगे। सरकारी गजट में प्रकाशन के बाद लड़ाकों के पास आवेदन के लिए केवल छह महीने का समय होगा।

इस विधेयक से राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन को प्रो-कुर्दिश डीईएम (DEM) पार्टी का बड़ा राजनीतिक समर्थन मिल सकता है। संसद में अगर समय से पहले चुनाव होते हैं, तो एर्दोगन को कार्यकाल की सीमा के बाद भी दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का अवसर मिल सकता है।

पीकेके की आपत्ति और विपक्ष का विरोध

दूसरी ओर, पीकेके ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब तक उनके नेता अब्दुल्ला ओचलान को आजाद नहीं किया जाता, तब तक निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। लड़ाकों को मुकदमों से सुरक्षा और राजनीतिक स्वतंत्रता मिलने के बाद ही वे अपने हथियार तुर्की सेना को सौंपने पर विचार करेंगे।

संसद में गुड पार्टी के नेता मुसावत दरविशोग्लू ने इस बिल का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह कानून केवल एर्दोगन की सत्ता बनाए रखने का प्रयास है। जबकि प्रो-कुर्दिश नेता गुलिस्तान किलिक कोकियांगित ने इसे देश में शांति स्थापित करने और लोकतंत्र मजबूत करने का ऐतिहासिक अवसर बताया है।

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