तुर्की और सऊदी अरब के साथ मिलकर इस्लामिक नाटो बना रहा पाकिस्तान (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

इस्लामिक नाटो बना रहा पाकिस्तान...तुर्की और सऊदी दे रहे साथ, जवाब के लिए भारत कितना तैयार?

Turkey Pakistan Saudi Alliance: तुर्की, पाकिस्तान, और सऊदी अरब के संभावित सैन्य गठबंधन से मध्यपूर्व और दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बदल सकता है, जबकि भारत और इजरायल की साझेदारी मजबूत हो रही है।

अक्षय साहू

Islamic NATO: मध्यपूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति एक नए मोड़ पर है, जहां तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक संभावित सैन्य गठबंधन के गठन की बातचीत गंभीर रूप से चल रही है। अगर यह गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पूरी तरह से बदल सकता है। यूरासियनटाइम की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ इसे अनौपचारिक रूप से "इस्लामिक नाटो" मान रहे हैं। 

यूरासियनटाइम की रिपोर्ट की माने तो इस गठबंधन की नींव सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट से पड़ी थी, जिसके तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे सभी साझेदार देशों पर हमला माना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे नाटो के आर्टिकल-5 में होता है।

इस्लामिक नाटो से किन देशों को खतरा?

तुर्की के इस समझौते में शामिल होने के बाद  कथित इस्लामिक नाटो और भी प्रभावशाली हो सकता है। सऊदी अरब के पास अपार आर्थिक संसाधन हैं, पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों के साथ एक मजबूत सैन्य बल है, और तुर्की नाटो का एक प्रमुख सदस्य होते हुए आधुनिक रक्षा उद्योग और वास्तविक युद्ध का अनुभव रखता है।  इन तीन देशों का संयोजन मध्यपूर्व, दक्षिण एशिया और अफ्रीका में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में, भारत, इजरायल, ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया जैसे देशों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि यह गठबंधन वर्तमान शक्ति समीकरणों को चुनौती दे सकता है।

भारत-इजरायल के बीच बढ़ी रक्षा साझेदारी

भारत और इजरायल के बीच रक्षा साझेदारी इस स्थिति में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बहुत मजबूत है, और इसके दायरे में अब केवल हथियारों की खरीदारी ही नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी भी शामिल है। भारत ने इजरायल से मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक हासिल की है, और हाल ही में 8.7 अरब डॉलर की रक्षा खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें SPICE मिसाइलों का भी समावेश है।

भारत अब इजरायल को केवल एक हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। इजरायल का रक्षा उद्योग, जो दुनिया का सबसे एडवांस माना जाता है, मिसाइल डिफेंस, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और लेजर हथियारों में वैश्विक मानक स्थापित कर चुका है। भारत और इजरायल के बीच सहयोग युद्धक मिसाइलों से लेकर साइबर सुरक्षा और खुफिया जानकारी तक विस्तृत है, और यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक तकनीक और लेजर डिफेंस तक फैल सकती है। 

संभावित खतरे के लिए भारत की तैयारी

भारत ने अपनी कूटनीति को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया है, जहां तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के संभावित गठबंधन को ध्यान में रखते हुए इजरायल, ग्रीस, साइप्रस के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है, और I2U2 जैसे मंचों के जरिए अमेरिका और यूएई के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दी है। भारत का उद्देश्य बदलती वैश्विक राजनीति में सुरक्षा, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी के जरिए अपनी स्थिति को मजबूत करना है।

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