Trump Warns Iran Threat Power Plants: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपनी अब तक की सबसे आक्रामक नीति का खुलासा किया है। रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने ईरान को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि उसने प्रस्तावित परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं किया तो उसे इसके 'विनाशकारी' परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में चेतावनी देते हुए कहा, 'अब और नरमी नहीं बरती जाएगी' (NO MORE MR NICE GUY!)।
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर साझा की गई अपनी पोस्ट में ईरान पर संघर्षविराम समझौते के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल ही में 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में गोलीबारी की है जो सीधे तौर पर मौजूदा सीजफायर समझौते का उल्लंघन है। ट्रंप के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई कई गोलियां एक फ्रांसीसी जहाज और यूनाइटेड किंगडम के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाकर चलाई गई थीं। राष्ट्रपति ने तंज कसते हुए कहा कि ईरान का यह व्यवहार 'बिल्कुल भी ठीक नहीं था'।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई की जो रूपरेखा पेश की है वह बेहद आक्रामक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ईरान नई परमाणु डील को ठुकराता है तो अमेरिकी सेना ईरान के 'हर एक बिजली संयंत्र और हर एक पुल' को पूरी तरह से नष्ट कर देगी। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई बहुत 'तेज और आसान' होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह वह सब करने के लिए तैयार हैं जो पिछले 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों को कर देना चाहिए था। उनका मुख्य उद्देश्य 'ईरान की किलिंग मशीन' (Iran Killing Machine) को हमेशा के लिए समाप्त करना है।
ट्रंप ने जानकारी दी कि उनके प्रतिनिधि अगले दौर की बातचीत और वार्ताओं के लिए कल शाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका द्वारा लगाई गई आर्थिक नाकेबंदी के कारण ईरान को प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना 'अजीब' है क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी ने इसे पहले ही प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान स्थिति के कारण कई मालवाहक जहाज अब ईरान के बजाय अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर रुख कर रहे हैं।
ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका एक 'बहुत ही उचित और तर्कसंगत' समझौते की पेशकश कर रहा है। अब यह पूरी तरह ईरान पर निर्भर करता है कि वह कूटनीतिक रास्ता चुनता है या फिर अपने देश के पूरे बुनियादी ढांचे को खोने का जोखिम उठाता है। ट्रंप के इस रुख ने यह साफ कर दिया है कि वह अब ईरान के मामले में किसी भी प्रकार की रियायत देने के मूड में नहीं हैं और ठोस कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।