परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप ईरान को चेतावनी दी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान पर हमले का मन बना चुके हैं ट्रंप! शांति वार्ता के बीच दी धमकी, कहा- नहीं हुआ समझौता तो बुरे होंगे परिणाम

US-Iran Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 10 दिन में परमाणु समझौता करने की चेतावनी दी, वरना गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही, बढ़ते क्षेत्रीय सैन्य तनाव के बीच।

अक्षय साहू

Trump Warns Iran on Nuclear Deal: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। वॉशिंगटन में गाजा शांति पहल की पहली बैठक के दौरान उन्होंने साफ कहा कि तेहरान को एक प्रभावी और ठोस परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के पास लगभग 10 दिनों का समय है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सार्थक डील चाहता है और बातचीत जारी है, लेकिन यदि समझौता नहीं हुआ तो हालात अच्छे नहीं होंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक अब समय आ गया है कि ईरान शांति का रास्ता चुने। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालता है तो अमेरिका “दूसरा रास्ता” अपनाने के लिए भी तैयार है।

जिनेवा में शांति वार्ता जारी

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में परोक्ष वार्ताएं चल रही हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि मध्यस्थों के जरिए ईरानी विदेश मंत्री से संवाद कर रहे हैं, ताकि परमाणु विवाद खुली सैन्य टकराव की स्थिति तक न पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय तनाव बढ़ सकता है। वॉशिंगटन की मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को या तो पूरी तरह समाप्त करे या उसमें बड़े पैमाने पर कटौती करे। अमेरिका का कहना है कि बढ़ता यूरेनियम संवर्धन परमाणु प्रसार के खतरे को जन्म देता है। वहीं ईरान लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और शोध उद्देश्यों के लिए है। तेहरान का कहना है कि संवर्धन पूरी तरह रोकने की मांग उसके संप्रभु अधिकारों के खिलाफ है।

लिखित प्रस्ताव पेश कर सकता है ईरान

सूत्रों के अनुसार, ईरान जल्द ही एक लिखित प्रस्ताव पेश कर सकता है जिसमें वह अमेरिकी चिंताओं के समाधान का खाका पेश करेगा। इसी के आधार पर तय होगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी या ठहराव की स्थिति बनेगी।

कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने मध्य पूर्व में 50 से अधिक उन्नत लड़ाकू विमान, जिनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल हैं, तैनात किए हैं। अतिरिक्त नौसैनिक संसाधन और वायु रक्षा प्रणाली भी भेजी गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम निवारक रणनीति का हिस्सा है, ताकि अमेरिकी बलों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 

दूसरी ओर, ईरान ने भी सैन्य अभ्यास किए हैं और चेतावनी दी है कि उसके परमाणु ठिकानों पर किसी भी हमले का जवाब कड़ा होगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। 

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है। दोनों देश खुला युद्ध नहीं चाहते, लेकिन बढ़ती सैन्य तैनाती और सख्त बयानबाजी से जोखिम बढ़ गया है। समुद्री या हवाई क्षेत्र में किसी भी गलत आकलन से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।

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