अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप ने ईरान को बोला Thank You: 800 फांसी की सजा रद्द होने पर तेवर नरम, वैश्विक तनाव में कमी

Iran Execution Cancelled: ट्रंप ने 800 फांसी की सजा रद्द करने पर ईरान को थैंक यू कहा। खाड़ी देशों के दबाव और 2000 मौतों के बाद अमेरिका के तेवर नरम पड़े, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा फिलहाल टला है।

प्रिया सिंह

Trump thanks Iran for halting executions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने कड़े रुख में अचानक नरमी दिखाते हुए तेहरान के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। ट्रंप ने यह कदम तब उठाया जब ईरान ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही कठोर कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए 800 से अधिक लोगों की फांसी की सजा को रद्द कर दिया। हालांकि इस बदलाव को खाड़ी देशों की कूटनीतिक चेतावनी और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस ने पहले सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी, लेकिन अब संतुलन और संवाद की ओर कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

ट्रुथ सोशल पर जताया आभार

शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के फैसले का स्वागत करते हुए लिखा कि वह फांसी की सजा रद्द किए जाने का बहुत सम्मान करते हैं। ट्रंप ने कहा कि 800 से अधिक लोगों को फांसी दी जानी थी, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने समय रहते इस पर रोक लगा दी, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। यह बयान पिछले दिनों दी गई सैन्य धमकियों के ठीक उलट है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की आशंका कुछ कम हुई है।

खाड़ी देशों की कूटनीतिक चेतावनी

पर्दे के पीछे वाशिंगटन के करीबी सहयोगियों सऊदी अरब और कतर ने अमेरिका को संभावित हमले के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी थी। खाड़ी अधिकारियों के अनुसार, इन देशों ने साफ कर दिया था कि ईरान पर कोई भी अमेरिकी हमला पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता पैदा करेगा जिसका खामियाजा खुद अमेरिका को भी भुगतना पड़ सकता है। इस दबाव के चलते अमेरिका ने अपनी 'सैन्य कार्रवाई' वाली योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

इजरायल की सुरक्षा और चिंताएं

ईरान के इस बदलते रुख के बीच इजरायल ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं और मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया वार्ता के लिए वाशिंगटन पहुंचे। इजरायली खुफिया एजेंसी का मानना है कि ईरान केवल समय हासिल करने के लिए यह नरमी दिखा रहा है, जबकि अंदरूनी तौर पर वह परमाणु कार्यक्रम और प्रॉक्सी समूहों को मजबूत कर रहा है। इजरायल अपनी सुरक्षा तैयारियों को 'पीक रेडीनेस' पर रखे हुए है और अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है।

हिंसा और मौतों का खौफनाक आंकड़ा

ईरान में 28 दिसंबर से आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक क्रांति में तब्दील हो गए, जिसमें अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह अशांति 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे भीषण घरेलू घटना मानी जा रही है। सुरक्षा बलों द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई में हजारों लोगों को जेलों में ठूंसा गया था, जिनमें से सैकड़ों को मौत की सजा सुना दी गई थी।

भविष्य की अनिश्चित स्थिति

हालांकि ट्रंप ने ईरान को धन्यवाद बोला है, लेकिन अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में सैन्य ठिकानों की तैनाती अभी कम नहीं की जाएगी। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों ने वहां के धार्मिक शासन की जड़ों को हिला दिया है और सरकार अब वैश्विक दबाव के कारण पीछे हटने को मजबूर हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति की कोई राह निकल पाती है या यह केवल एक अस्थायी विराम है।

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