ट्रम्प और अयातुल्ला खामेनेई , कॉन्सेप्ट फोटो 
विदेश

ट्रंप का 'साइलेंट गेम': बिना मिसाइल ईरान को घुटनों पर लाने की तैयारी, साइबर और साइकोलॉजिकल वॉर का नया प्लान

Iran Protest: ईरान में जारी बगावत के बीच ट्रंप अब बिना गोला-बारूद के 'नॉन-काइनेटिक' स्ट्राइक की योजना बना रहे है। इसमें साइबर हमले और मनोवैज्ञानिक युद्ध के जरिए सत्ता को कमजोर करने का लक्ष्य है।

अमन उपाध्याय

Donald Trump Iran Plan: ईरान में जारी आंतरिक गृहयुद्ध और विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका अब एक ऐसे 'साइलेंट' युद्ध की तैयारी कर रहा है जिसमें मिसाइलों या बमों की जरूरत नहीं होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान की सत्ता को कमजोर करने के लिए साइबर अटैक, साइकोलॉजिकल वॉर (मनोवैज्ञानिक युद्ध) और आर्थिक दबाव जैसे विकल्प रखे गए हैं। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य बिना किसी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के ईरान की संचार व्यवस्था और जनता के मनोबल पर प्रहार करना है।

सीधे हमले से क्यों बच रहा है अमेरिका?

साल 2025 में ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर खुलकर बमबारी की थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। ईरान वर्तमान में अपने ही घर के भीतर भीषण बगावत का सामना कर रहा है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का मानना है कि इस वक्त सीधा सैन्य हमला करने से ईरानी सरकार खुद को 'पीड़ित' (Victim) के तौर पर पेश कर सकती है, जिससे वहां चल रहे जन-आंदोलन कमजोर पड़ सकते हैं। इसीलिए, ट्रंप प्रशासन अब 'नॉन-काइनेटिक' यानी बिना हथियार चलाए असर डालने वाले उपायों पर फोकस कर रहा है।

साइबर हमले से मचेगा कोहराम

पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, नई रणनीति के तहत ईरान के कमांड सिस्टम, सैन्य नेटवर्क और सरकारी संचार ढांचे को साइबर ऑपरेशंस के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। यदि अमेरिका ईरान की डिजिटल रीढ़ तोड़ देता है, तो बिना एक भी गोली चलाए देश की पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है। हालांकि ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने आज भी सैन्य टारगेट बने हुए हैं, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता संचार तंत्र को ठप करने की है।

दिमाग पर वार करने की तैयारी

डिजिटल हमलों के साथ-साथ अमेरिका साइकोलॉजिकल वॉर की तैयारी भी कर रहा है। इसके तहत ईरान के सरकारी मीडिया की विश्वसनीयता खत्म करना, जनता में असंतोष बढ़ाना और सुरक्षा बलों के मनोबल को गिराना शामिल है। अमेरिकी रक्षा अधिकारी इसे 'इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स' कह रहे हैं, जिसमें साइबर और मनोवैज्ञानिक युद्ध को जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। मकसद साफ है कि ईरान की जनता खुद अपनी सरकार के खिलाफ खड़ी हो जाए।

ईरान में हालात बेकाबू

पिछले दो हफ्तों से ईरान के सभी 31 प्रांतों में प्रदर्शन जारी हैं और सरकार ने हालात को दबाने के लिए देशभर में इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक 600 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। ऐसे में अमेरिका द्वारा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने जैसे संकेतात्मक कदम और कूटनीतिक चेतावनियां भी इस दबाव की रणनीति का हिस्सा हैं। फिलहाल ट्रंप के सामने सभी विकल्प टेबल पर हैं, लेकिन अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

आपको कट्टर आतंकवादी मार देंगे, चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी; मंत्रालय को मिले पत्र से हड़कंप

एमपी BJP में हलचल के बीच नितिन नवीन से मिले CM मोहन यादव; कैबिनेट विस्तार समेत कई मुद्दों पर चर्चा के कयास

जीजा और उनकी पार्टी को हराएंगे पाठक जी के साले! पारिवारिक कलह ने बढ़ाई डिप्टी सीएम की मुश्किलें

लोगों ने कोशिश की... लेकिन हमारे और योगी जी के बीच कोई दिवार नहीं, सीएम वाले बयान पर केशव प्रसाद मौर्य की सफाई

Teachers Day पर DU पहुंचेंगे PM मोदी, SRCC में छात्रों से करेंगे संवाद, 5 सितंबर को लेकर तैयारियां तेज