डोनाल्ड ट्रंप, रजा पहलवी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

खामेनेई के मरते ही गद्दी का सपना देखने लगे थे पहलवी, ट्रंप ने खिसका दी पैरों तले जमीन, कहा- नहीं सौंपेंगे कमान

US-Iran War: रजा पहलवी को अमेरिका का झटका लगा, ट्रंप ने कहा ईरानी सत्ता किसी स्थानीय व्यक्ति को सौंपना बेहतर होगा। पहलवी निर्वासन में हैं, उनकी स्वीकार्यता जनता पर निर्भर।

अक्षय साहू

Trump Refuses Reza Pahlavi to hand over Iran's Power: ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे बड़े विरोधी रहे निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी को अमेरिका से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनका प्रशासन पहलवी को ईरान की सत्ता सौंपने का समर्थन नहीं करेगा। अब अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियान के बाद ईरान की सत्ता वहां के मौजूदा शासन के भीतर किसी व्यक्ति को ही सौंपने का रास्ता अपनाया जाएगा।

दरअसल, रजा पहलवी ईरान की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। उनके पिता पहले ईरान के शासक थे, लेकिन खामेनेई और अन्य लोगों के विद्रोह के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। ट्रंप और इजरायल के साथ खामेनेई के टकराव के बाद पहलवी फिर सक्रिय हो गए। जब इजरायल के हमले में अली खामेनेई मारे गए, तब पहलवी ने ट्रंप को इसके लिए धन्यवाद भी कहा।

रजा पहलवी को नहीं मिलेगी सत्ता

कई लोग मान रहे थे कि सैन्य कार्रवाई समाप्त होने के बाद ट्रंप रजा पहलवी को ईरान का प्रमुख बना सकते हैं, लेकिन मंगलवार को ट्रंप ने अपने संबोधन में इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। इससे रजा पहलवी को बड़ा झटका लगा है। डोनाल्ड ट्रंप पहले भी पहलवी पर संदेह जता चुके हैं। जनवरी में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पहलवी अच्छे इंसान लगते हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वह अपने ही देश में कितना प्रभाव डाल पाएंगे।ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के अभियान के बाद ईरानी शासन के भीतर से ही किसी व्यक्ति का नेतृत्व करना सबसे बेहतर विकल्प होगा।

अमेरिका के सारे विकल्प युद्ध में मारे गए

ट्रंप ने कहा कि जिन लोगों के बारे में सोचा गया था, वे सभी युद्ध में मारे जा चुके हैं। अब ईरानी जनता को खुली आजादी में जीने का अवसर मिला है। ऐसे में उन्हें एक ऐसा नेता चाहिए जो विकास पर ध्यान दे, न कि कोई ऐसा व्यक्ति जो पहले के शासन के जितना ही बुरा हो।

उन्होंने यह भी कहा कि यह तय करना कठिन है कि ईरानी जनता रजा पहलवी को स्वीकार करेगी या नहीं। अगर जनता उन्हें स्वीकार करती है, तो अमेरिका को आपत्ति नहीं होगी। लेकिन केवल नाम या पहचान के आधार पर किसी को नेतृत्व के लिए सही नहीं माना जा सकता। इस वजह से उन लोगों को भी निराशा हुई जो पहलवी राजवंश की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे।

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