अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

'मुझे किसी इंटरनेशनल कानून की जरूरत नहीं'... दुनिया के नेताओं को डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक

Trump Global Order Disruption: ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला साल वैश्विक उथल-पुथल और 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद से भरा रहा। अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर अमेरिका को 66 संगठनों से बाहर किया।

प्रिया सिंह

Trump's Defiance of International Law: 20 जनवरी 2025 को सत्ता संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप ने स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में भारी हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है और उनकी शक्ति की सीमा केवल उनकी नैतिकता है। ट्रम्प द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कानून की अवहेलना के इस एक साल में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और G-20 जैसी संस्थाओं को बेबस कर दिया है। ट्रंप के इन कदमों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कूटनीतिक शिष्टाचार की धज्जियां उड़ा दी हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना

8 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अमेरिकी सीनाजोरी को परिभाषित करते हुए कहा कि वे किसी वैश्विक कानून के अधीन नहीं हैं। उन्होंने मनमाने ढंग से अमेरिकी विदेश नीति को लागू करना शुरू कर दिया है, जिससे विश्व शांति के रखवाले माने जाने वाले संगठन अब अपना पसीना पोंछ रहे हैं। आलोचक इसे विश्व स्तर पर कायदे-कानून की पूर्ण अवहेलना के रूप में देख रहे हैं।

वेनेजुएला में 'सनकी' सैन्य ऑपरेशन

3 जनवरी को ट्रंप ने आधी रात को एक सैन्य ऑपरेशन का निर्देश दिया, जिसमें अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से ही उठा लिया। ट्रंप ने उन पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए और घोषणा की कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा। उन्होंने बिना संयुक्त राष्ट्र या अपनी कांग्रेस को सूचित किए इस हमले को अंजाम दिया और वेनेजुएला के तेल संसाधनों के दोहन की बात कही।

रेसिप्रोकल टैरिफ का 'हंटर'

आर्थिक मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को टैरिफ के जरिए परीक्षा में डाल दिया है। अप्रैल 2025 में 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट' के तहत उन्होंने सभी देशों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। उन्होंने 'रेसिप्रोकल टैरिफ' की नीति अपनाई है, जिसका अर्थ है कि जो देश अमेरिका से जितना शुल्क लेंगे, अमेरिका भी उनसे उतना ही वसूलेगा।

गाजा पीस प्लान और 'बोर्ड ऑफ पीस'

ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए एक 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया है और खुद इसके चेयरमैन बन गए हैं। वे गाजा को एक 'मॉडर्न मिरेकल सिटी' बनाना चाहते हैं ताकि अमेरिकी कंपनियों को वहां निर्माण के बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल सकें। उन्होंने इस बोर्ड में अन्य देशों को शामिल करने के लिए 1 अरब डॉलर की 'पंचायत फीस' मांगी है, जिसका प्रस्ताव भारत को भी दिया गया है।

66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बड़े पैमाने पर निकासी

7 जनवरी 2026 को एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम साइन कर ट्रंप ने अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर कर दिया। इनमें पेरिस जलवायु समझौता और भारत के नेतृत्व वाला 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस' भी शामिल है। ट्रंप का मानना है कि ये संगठन अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद करते हैं और देश की संप्रभुता (Sovereignty) के लिए खतरा हैं।

दक्षिण अफ्रीका को G-20 से बाहर करना

नवंबर 2025 में ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में हुए G-20 शिखर सम्मेलन का न केवल बहिष्कार किया, बल्कि उस देश को सदस्यता के अयोग्य घोषित कर दिया। उन्होंने वहां गोरे किसानों पर हमलों का आरोप लगाया और दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सभी पेमेंट और सब्सिडी बंद करने का आदेश दिया। 2026 में मियामी में होने वाले सम्मेलन में उसे न्योता भी नहीं दिया गया है।

विस्तारवादी नजर, अब ग्रीनलैंड की बारी

ट्रंप के विस्तारवादी मिशन का अगला लक्ष्य ग्रीनलैंड है। उनका तर्क है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण आवश्यक है अन्यथा रूस या चीन उस पर कब्जा कर सकते हैं। इसके विरोध में डेनमार्क के नेताओं के साथ ट्रंप की तीखी बयानबाजी और टैरिफ युद्ध की स्थिति बनी हुई है।

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