डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप का ईरान को अंतिम अल्टीमेटम: डील करो या तबाही के लिए तैयार रहो, सीजफायर के बीच दी हमले की धमकी

Trump Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज नाकाबंदी पर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला हुआ है।

अमन उपाध्याय

Trump Iran War Deal Warning: दुनियाभर में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर महायुद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने तेवर बेहद कड़े कर लिए हैं। सीजफायर होने के बावजूद ट्रंप ने सीधे शब्दों में संकेत दिया है कि यदि ईरान ने उनकी शर्तों पर डील नहीं किया तो उस पर दोबारा हमले शुरू किए जा सकते हैं। राष्ट्रपति ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका के लिए सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी पूरी तरह खुला हुआ है।

इन मुद्दों पर फंसा है पेंच

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस गतिरोध के पीछे तीन सबसे बड़े मुद्दे हैं जिन पर दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पहला मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। दूसरा सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट में की गई नाकाबंदी है जिसने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। तीसरा मुद्दा भविष्य में एक-दूसरे पर हमले न करने की सुरक्षा गारंटी का है। अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है जबकि ईरान अपने परमाणु मिशन को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा है।

कमजोर हो चुका है ईरान

राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि लंबे समय से जारी तनाव और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से कमजोर हो चुका है और वह डील करने के लिए मजबूर है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान की स्थिति ऐसी है कि उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि उनका असली नेता कौन है। ट्रंप को भरोसा है कि देर-सवेर ईरान को अमेरिकी शर्तों के आगे झुकना ही पड़ेगा, क्योंकि उन पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

पाकिस्तान के जरिए आया ईरान का नया प्रस्ताव

दोनों देशोंं में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, ट्रंप के 9 शर्तों वाले 'पीस प्लान' के जवाब में ईरान ने 14 शर्तों वाला एक जवाबी प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। इस नए फॉर्मूले में तनाव कम करने के लिए होर्मुज में राहत और परमाणु मुद्दे पर कुछ लचीलापन दिखाने की बात कही गई है। इसके बदले में ईरान ने प्रतिबंधों में ढील और भविष्य के लिए सुरक्षा गारंटी की भी मांग की है।

दुनिया में तेल संकट का डर

इस कूटनीतिक खींचतान के बीच सबसे बड़ी चिंता होर्मुज को लेकर है। अमेरिका ने इसे फ्रेंडली ब्लॉकेड करार दिया है लेकिन इसकी वजह से ईरान की आर्थिक कमर टूट रही है। ईरान भारी मात्रा में कच्चे तेल का उत्पादन तो कर रहा है लेकिन वह उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच नहीं पा रहा है। इसका असर केवल ईरान पर ही नहीं बल्कि चीन जैसे उन देशों पर भी पड़ रहा है जो ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदते हैं।

8 अप्रैल से भले ही युद्ध रुका हुआ है लेकिन 28 फरवरी को शुरू हुई इस तनातनी ने वैश्विक बाजारों में टेंशन पैदा कर दी है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नए प्रस्ताव पर मुहर लगेगा या फिर डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी किसी भीषण सैन्य टकराव की शुरुआत करेगी।

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