डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

टैरिफ के बाद ट्रंप का एक और झटका! PAX सिलिका इनिशिएटिव से भारत बाहर, AI चिप पर रोक

US Pax Silica Plan: अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' पहल में भारत को शामिल नहीं किया। यह AI और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और नवाचार-प्रधान बनाने वाली रणनीति है, जिसमें आठ अन्य देश शामिल हैं।

अक्षय साहू

US Excludes India From Pax Silica: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'पैक्स सिलिका' नाम की नई योजना शुरू की है। इसमें भारत को शामिल नहीं किया गया। यह योजना सिलिकॉन की सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने पर केंद्रित है, जो एआई और कंप्यूटर चिप्स के लिए जरूरी है। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे आठ देश हैं। ये देश दुनिया की टॉप टेक कंपनियों का घर हैं।

'पैक्स सिलिका' का नाम दो शब्दों से आया है, 'पैक्स' जिसका मतलब है शांति और स्थिरता, और 'सिलिका' यानी सिलिकॉन, जो कंप्यूटर चिप्स का मुख्य घटक है। इसका मकसद दुनिया की एआई और टेक्नोलॉजी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना है। इसके तहत खनिज, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, एआई बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और सेमीकंडक्टर सहित पूरी तकनीकी श्रृंखला को ध्यान में रखा गया है।

आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम को कम करना मकसद

इस पहल के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये देश नई और परिवर्तनकारी तकनीकों को बड़े पैमाने पर विकसित कर सकें। इसके लिए वे आपसी सहयोग और संयुक्त निवेश के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम को कम करना चाहते हैं। खासकर ऐसे देशों से, जिन पर भरोसा कम है या जिनका नियंत्रण चिंताजनक माना जाता है। इस पहल का एक बड़ा मकसद आर्थिक सुरक्षा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश मानते हैं कि सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाएं, भरोसेमंद तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय शक्ति और आर्थिक विकास के लिए जरूरी हैं। एआई की बढ़ती ताकत और तकनीकी निर्भरता को देखते हुए यह पहल उन खतरों का जवाब देती है, जो वैश्विक टेक्नोलॉजी पर निर्भरता से उत्पन्न हो सकते हैं।

भारत को क्यों किया बाहर?

भारत को इस पहल में शामिल न करने का मतलब यह है कि उसे वैश्विक तकनीकी गठबंधनों और एआई-संचालित प्रौद्योगिकी लाभों से सीमित पहुँच मिलेगी। यह भारत के लिए एआई और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने की कोशिशों में एक चुनौती हो सकती है।

हालांकि, भारत भी पीछे नहीं है। टाटा ग्रुप ने इंटेल के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर उत्पादन की योजना बनाई है। इससे भारत की वैश्विक चिप सप्लाई में भूमिका मजबूत होगी और देश का तकनीकी इकोसिस्टम बढ़ेगा। भारत को अपनी रणनीति और घरेलू तकनीकी विकास पर जोर देने की जरूरत है ताकि वह भविष्य में एआई और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह बना सके।

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