अमेरिका-चीन के बीच बढ़ी टेंशन, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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ट्रंप ने छीना चीन का 'चैन'... वेनेजुएला से बीजिंग जाने वाले कच्चे तेल पर US का कब्जा, भड़का ड्रैगन

China US Tension: वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर अमेरिका और चीन के बीच 'ऑयल वॉर' शुरू हो गया है। ट्रंप ने चीन जाने वाले 50 मिलियन बैरल तेल को रिफाइन कर बेचने का ऐलान किया है।

अमन उपाध्याय

China US News In Hindi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि अमेरिका ने वेनेजुएला से करीब 2 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल के आयात के लिए एक बड़ा समझौता किया है।

इस योजना के केंद्र में वे 50 मिलियन (5 करोड़) बैरल कच्चा तेल है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी के कारण लंबे समय से वेनेजुएला में फंसा हुआ था। ट्रंप प्रशासन अब इस तेल को रिफाइन करने और बेचने की तैयारी कर रहा है जो सीधे तौर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

हमारा तेल चुरा रहा है अमेरिका

इस घोषणा के तुरंत बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन का आधिकारिक दावा है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात को जानबूझकर चीन की बजाय अपनी ओर मोड़ (डाइवर्ट) रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि वेनेजुएला में चीन और अन्य देशों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा की जानी चाहिए। चीन के अनुसार, वेनेजुएला के साथ उनका सहयोग दो संप्रभु देशों के बीच का मामला है और यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सुरक्षित है।

व्यापारिक नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप

चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई को न केवल व्यापारिक नियमों के खिलाफ बताया है बल्कि इसे तीसरे देशों के वैध समझौतों में सीधा दखल करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया और गहरा तनाव पैदा कर सकता है। गौरतलब है कि वेनेजुएला में चीन ने भारी निवेश किया है और वह वहां से तेल का बड़ा खरीदार रहा है। अब अमेरिका द्वारा इस तेल खेप को अपने कब्जे में लेना चीन की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

वैश्विक तेल बाजार पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। चूंकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है, इसलिए वेनेजुएला के इस भारी भंडार के बाजार में आने से वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है। हालांकि, इसकी कीमत राजनीतिक अस्थिरता के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के तहत अपने प्रभाव क्षेत्र (पश्चिमी गोलार्ध) से चीन और रूस के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने पर तुला है।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी तल्खी

यह तेल विवाद ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है। जहां एक ओर भारत जैसे देश इसे अमेरिका का आंतरिक फैसला बता रहे हैं वहीं चीन इसे अपने आर्थिक हितों पर चोट के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में यह 'ऑयल वॉर' और उग्र होने की संभावना है, क्योंकि चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने वैध अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेगा।

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