बिलाल एर्दोगन बांग्लादेश दौरे पर पहुंचे, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
विदेश

तारिक रहमान के PM बनते ही ढाका पहुंचे एर्दोगन के बेटे, क्या बांग्लादेश बनेगा तुर्की का नया 'हथियार'?

Bilal Erdogan Dhaka Visit: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही तुर्की ने सक्रियता बढ़ा दी है। PM तारिक रहमान के शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर बिलाल एर्दोगन का ढाका पहुंचे हैं।

अमन उपाध्याय

Bangladesh Turkey Relations: बांग्लादेश की राजनीति में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन ने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है। जैसे ही तारिक रहमान ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली उसके महज 24 घंटे के भीतर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के बेटे बिलाल एर्दोगन एक प्राइवेट जेट से ढाका पहुंच गए।

जानकारों का मानना है कि यह कोई सामान्य दौरा नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में भारत के पारंपरिक प्रभाव को चुनौती देने के लिए तुर्की, पाकिस्तान और चीन के बीच बनते एक नए 'त्रिगुट' का स्पष्ट संकेत है।

मेसुत ओजिल के साथ ढाका पहुंचे बिलाल

एर्दोगन बिलाल एर्दोगन के इस दौरे में उनके साथ तुर्की की ताकतवर एजेंसी TIKA के चेयरमैन अब्दुल्ला एरॉन और मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी मेसुत ओजिल भी शामिल थे। बिलाल ने ढाका यूनिवर्सिटी में एक नए मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की फंडिंग तुर्की की एजेंसी TIKA ने तब शुरू की थी जब वहां की कट्टरपंथी छात्र शाखा 'इस्लामी छात्र शिबिर' ने चुनाव जीता था। स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह दौरा आधिकारिक प्रोटोकॉल से कहीं अधिक गहरा है जो तुर्की और बांग्लादेश के बीच बढ़ती 'धार्मिक और वैचारिक' नजदीकी को दर्शाता है।

डिफेंस सौदों में तुर्की की लंबी छलांग

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही बांग्लादेश और तुर्की के बीच रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। बांग्लादेश ने तुर्की से 600 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम लागत के साथ छह 'T129 ATAK' अटैक हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा फाइनल किया है। तुर्की अब बांग्लादेश को हथियारों की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश बनता जा रहा है जो क्षेत्र में सैन्य संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए बढ़ती चुनौतियां

मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान ही बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन के काफी करीब चला गया था यहां तक कि पाकिस्तान के साथ सीधी फ्लाइट्स भी फिर से शुरू कर दी गई थीं। अब इस गुट में तुर्की की एंट्री भारत के लिए चिंता का विषय है। तुर्की अक्सर कश्मीर जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पाकिस्तान का खुला समर्थन करता आया है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों को डर है कि यदि तुर्की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोहिंग्या मुद्दे पर बांग्लादेश का पुरजोर साथ देता है तो बदले में वह बांग्लादेश से कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ समर्थन मांग सकता है। इससे भारत के लिए अपने पड़ोसी देश से कूटनीतिक सहयोग प्राप्त करना काफी मुश्किल हो सकता है। हालांकि, भारत अब भी उम्मीद लगाए हुए है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में द्विपक्षीय रिश्ते सुधर सकते हैं लेकिन तुर्की की बढ़ती दखलअंदाजी ने दिल्ली के गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

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