होर्मुज से निकला जापानी तेल टैंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

खुल गया है होर्मुज का रास्ता? युद्ध के बीच पहली बार निकला जापानी तेल टैंकर, क्या अब टलेगा ऊर्जा संकट

Strait Of Hormuz: ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार एक जापानी सुपरटैंकर और यूएई का एलएनजी जहाज होर्मुज को पार करने में सफल रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिली है।

अमन उपाध्याय

Strait Of Hormuz Crossed Japanese Oil Tanker: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार, जापान से जुड़ा एक विशाल तेल टैंकर इस खतरनाक जलमार्ग को सुरक्षित पार करने में सफल रहा है।

जहाज-ट्रैकिंग डेटा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि युद्ध के कारण हफ्तों से यह मार्ग जहाजों के लिए लगभग बंद पड़ा था।

एक ही जगह पर था खड़ा

इस जापानी लिंक वाले सुपरटैंकर की पहचान 'इडेमिट्सु मारू' के रूप में हुई है। डेटा के अनुसार, इस जहाज ने सोमवार देर रात अबू धाबी के उत्तर-पश्चिम से अपनी यात्रा शुरू की थी। इससे पहले सुरक्षा कारणों से यह जहाज एक सप्ताह से अधिक समय तक एक ही स्थान पर स्थिर खड़ा था। अपनी यात्रा के दौरान, टैंकर ने ईरान के क्युशम और लाराक द्वीपों के पास संकरे रास्ते से गुजरते हुए पूर्व की ओर अपनी दिशा बनाए रखी। यह टैंकर सऊदी अरब के जुआमा टर्मिनल से लोड किया गया लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा है।

जापान की ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज का महत्व

यह मार्ग जापान के लिए जीवन रेखा के समान है, क्योंकि जापान अपनी तेल जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत आयात मध्य पूर्व के देशों से इसी जलमार्ग के जरिए करता है। 'इडेमिट्सु मारू' का प्रबंधन जापानी शिपिंग दिग्गज इडेमिट्सु कोसान की एक इकाई द्वारा किया जा रहा है। हालांकि कंपनी ने इस व्यक्तिगत यात्रा पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, लेकिन पनामा के झंडे वाले इस 'वेरी लार्ज क्रूड कैरियर' (VLCC) की सफल आवाजाही ने बाजार में सकारात्मक संदेश भेजा है।

LNG सप्लाई में भी मिली पहली कामयाबी

तेल के साथ-साथ गैस क्षेत्र से भी अच्छी खबर मिली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा संचालित एक LNG टैंकर, 'मुबारज' भी होर्मुज को पार करने में सफल रहा है। 1,32,000 घन मीटर से अधिक एलएनजी लेकर जा रहा यह जहाज मार्च की शुरुआत में दास द्वीप पर लोड होने के बाद से फंसा हुआ था। हैरानी की बात यह है कि इस जहाज ने अपनी यात्रा को गोपनीय रखने के लिए कई हफ्तों तक अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखा था और यह सीधे भारत के पास समुद्र में फिर से दिखाई दिया। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है, तो संघर्ष शुरू होने के बाद से यह होर्मुज से गुजरने वाला पहला एलएनजी कार्गो होगा।

क्या खुल गया है होर्मुज का रास्ता?

शिपिंग विश्लेषकों का मानना है कि 18-19 अप्रैल के सप्ताहांत के दौरान कई जहाजों ने एक साथ इस जलमार्ग को पार करने का प्रयास किया था, जिसमें कम से कम सात एलएनजी टैंकर शामिल थे। 'मुबारज' टैंकर अब चीन की ओर बढ़ रहा है और इसके मई के दूसरे भाग में पहुंचने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि खतरा अभी टला नहीं है, लेकिन इन बड़े जहाजों की सफल आवाजाही यह दर्शाती है कि कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर पर कुछ ऐसे प्रयास सफल रहे हैं जिनसे वैश्विक मंदी के खतरे को कम किया जा सके।

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