UAE ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, युद्ध के बीच US से मांगा मुआवजा, कहा- भरपाई करो वरना डॉलर से युआन पर होंगे शिफ्ट

UAE-US Tension: संयुक्त अरब अमीरात ने अमेरिका से युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और वित्तीय गारंटी की मांग की है। यूएई ने चेतावनी दी है कि डॉलर की कमी होने पर वह तेल व्यापार युआन में शुरू कर सकता है।
UAE Demands Compensation From US
UAE ने अमेरिका से मुआवए की मांग की (सोर्स- सोशल मीडिया)
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UAE Demands Compensation From US: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब नए भू-राजनीतिक और आर्थिक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुलकर अमेरिका को इस युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया है और उससे युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने अमेरिका से वित्तीय गारंटी यानी “बैकस्टॉप” की मांग की है, ताकि युद्ध के दौरान उसकी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई हो सके। यह मांग इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि अगर अमेरिका इसे मान लेता है, तो अन्य खाड़ी देश भी मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

युद्ध में रोजाना 1 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा US

इस युद्ध ने अमेरिका पर भी भारी आर्थिक बोझ डाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में अमेरिका रोजाना करीब 890 मिलियन से 1 बिलियन डॉलर तक खर्च कर रहा है। वहीं इजरायल भी अब तक 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है। युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की लागत इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, खासकर सऊदी अरब जैसे देशों में ऊर्जा ढांचे की मरम्मत के लिए 60 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च का अनुमान है। UAE को इस संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। दुबई में नागरिक ढांचे जैसे फेयरमॉंट द पाम होटल और फुजैरा के तेल निर्यात टर्मिनल पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से भारी क्षति हुई है। इसके अलावा अमेजन के डेटा सेंटर भी प्रभावित हुए, जिससे बैंकिंग और क्लाउड सेवाओं में बाधा आई।

होर्मुज में नाकेबंदी के कारण तेल निर्यात प्रभावित

UAE सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बालामा ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व से करेंसी स्वैप की मांग की है, ताकि डॉलर की कमी से निपटा जा सके। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के कारण तेल निर्यात और डॉलर आय प्रभावित हुई है। यूएई अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका ने यह युद्ध क्षेत्रीय सहयोगियों से बिना पर्याप्त चर्चा के शुरू किया, इसलिए इसका वित्तीय बोझ भी उसे ही उठाना चाहिए। यह रुख 1991 के खाड़ी युद्ध से बिल्कुल अलग है, जब सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिका को आर्थिक सहायता दी थी।

युआन में तेल व्यापार शुरू कर सकता है UAE

अब स्थिति उलटती दिख रही है। डोनाल्ड ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि यदि वह यूएई की मांग मानते हैं, तो कतर और अन्य खाड़ी देश भी इसी तरह के दावे कर सकते हैं। दूसरी ओर, ईरान ने भी यूएई, सऊदी अरब और अन्य देशों से 270 बिलियन डॉलर के मुआवजे की मांग की है।

स्थिति और जटिल तब हो जाती है जब यूएई यह संकेत देता है कि अगर डॉलर की उपलब्धता प्रभावित हुई, तो वह तेल व्यापार में चीनी युआन का इस्तेमाल शुरू कर सकता है। यह कदम वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर की स्थिति के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

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