यून सुक येओल, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

दक्षिण कोरिया में सत्ता का भूचाल! पूर्व राष्ट्रपति पर ‘राजद्रोह’ का आरोप, क्या मिलेगी फांसी की सजा?

Yoon Suk Yeol News: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के लिए अभियोजन पक्ष ने फांसी की सजा का अनुरोध किया है। उन पर दिसंबर 2024 में असंवैधानिक रूप से मार्शल लॉ लगाने का आरोप है।

अमन उपाध्याय

South Korea Former President News: दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व मोड़ आया है। पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ चल रहे विद्रोह और राजद्रोह के मामले में स्वतंत्र वकीलों की टीम ने अदालत से उन्हें फांसी की सजा देने का अनुरोध किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब अभियोजन पक्ष ने उन्हें लोकतंत्र पर हमला करने वाला राजद्रोह का रिंगलीडर करार दिया है।

मार्शल लॉ और लोकतंत्र पर हमला

यून सुक योल पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने दिसंबर 2024 में असंवैधानिक रूप से मार्शल लॉ लागू किया था। विशेष अभियोजकों के अनुसार, उन्होंने सेना के जरिए संसद को ब्लॉक करने की कोशिश की और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने का प्रयास किया ताकि अपनी सत्ता बचा सकें। दक्षिण कोरियाई कानून के तहत, विद्रोह के मुख्य साजिशकर्ता को मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है।

पद से हटने से लेकर जेल तक का सफर

यून सुक योल का पतन जनवरी 2025 में शुरू हुआ जब उन्हें पद पर रहते हुए ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद, अप्रैल 2025 में संवैधानिक न्यायालय ने उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग को बरकरार रखा जिसके कारण उन्हें राष्ट्रपति पद से हाथ धोना पड़ा। फिलहाल वे जेल में बंद हैं और कुल सात अलग-अलग आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं।

यून सुक योल पर क्या है मामले?

विद्रोह के आरोप के अलावा यून सुक योल पर कई और गंभीर मामलों में भी शिकंजा कसा गया है। उन पर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार और रिश्वत से जुड़े मामलों की भी जांच चल रही है। इतना ही नहीं, उत्तर कोरिया की ओर सैन्य ड्रोन भेजने के उनके फैसले को लेकर भी भारी विवाद खड़ा हो गया है, जिसे एक संवेदनशील और विवादास्पद कदम माना जा रहा है।

बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें

अदालत में यून के वकीलों ने तर्क दिया कि मार्शल लॉ लगाना एक 'राजनीतिक निर्णय' था जो न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नष्ट करने का एक आपराधिक प्रयास था, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा अनिवार्य है।

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