धहरान में सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की खबर, इमारत में आग लगी।
सऊदी अधिकारियों ने रियाद और दक्षिणी इलाकों में मिसाइलों तथा ड्रोन को रोकने का दावा किया।
ईरान ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की।
Saudi Aramco Missile Attack: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। सऊदी अरब के धहरान शहर में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, हमले के बाद इमारत में आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इस घटनाक्रम के बीच रियाद और देश के अन्य इलाकों में मिसाइलों तथा ड्रोन को रोकने के दावे भी किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान में सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी SPA ने ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले के बाद इमारत में आग लग गई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कंपनी से जुड़े एक सूत्र के हवाले से कहा गया कि कार्यालय की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी और उसके पीछे किसका हाथ था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
सऊदी अरामको दुनिया की प्रमुख तेल कंपनियों में शामिल है और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी के संचालन नेटवर्क में तेल के कुएं, पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं।
ऐसे में कंपनी के किसी प्रमुख प्रशासनिक या परिचालन परिसर पर हमला ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में हमले से तेल उत्पादन या निर्यात पर पड़े किसी प्रत्यक्ष असर की पुष्टि नहीं की गई है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, धहरान के ऊपर रोकी गई एक मिसाइल के टुकड़े एक आवासीय इलाके में गिरे। अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्सों में भी मिसाइलों और ड्रोन को रोककर नष्ट करने की जानकारी दी। इन घटनाओं के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि, सभी घटनाओं में नुकसान और हताहतों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, धहरान में हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों के जवाब में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
उन्होंने संभावित निशानों में धहरान स्थित अरामको परिसर और रियाद की एक तेल रिफाइनरी का उल्लेख किया था। हूतियों ने सऊदी अरब में तेल क्षेत्र के कर्मचारियों को भी उन ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी दी थी, जिन्हें वे संभावित लक्ष्य मानते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इस खास मिसाइल हमले की जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
सऊदी अरब अपने सैन्य अभियान को जारी रखने और हूतियों के मिसाइल तथा ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए सहयोगी देशों से अधिक समर्थन मांग रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ सऊदी अरब की लंबे समय से सुरक्षा साझेदारी रही है, लेकिन वॉशिंगटन ने हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने के सऊदी प्रयासों को अब तक स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य प्रतिक्रिया को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।
इस बीच ईरान ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को यह प्रस्ताव रखा था और ईरानी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इसे दोहराया।
यह पेशकश ऐसे समय आई है, जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच हमलों तथा जवाबी कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान लंबे समय से सऊदी अरब का क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी रहा है और हूतियों का समर्थन करता है।
अरामको परिसर पर हमले की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब सऊदी अरब में एक बड़ा ऊर्जा सम्मेलन आयोजित हो रहा है। तेल प्रतिष्ठानों और परिवहन ढांचे को निशाना बनाए जाने की आशंका से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ सकती है।
हालांकि, किसी भी संभावित असर का आकलन करने के लिए तेल उत्पादन, निर्यात और परिचालन गतिविधियों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जरूरी होगी। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि हमलों का सिलसिला जारी रहता है या क्षेत्रीय कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें आगे बढ़ती हैं।