

इतिहास का सबसे गर्म साल बन सकता है 2026
दुनियाभर में गहरा रहा है जलवायु परिवर्तन का खतरा
पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.5 डिग्री अधिक तापमान
अल नीनो के प्रभाव से बढ़ेगी और भीषण गर्मी
वैश्विक तबाही का बढ़ सकता है बड़ा खतरा
Hottest Year 2026: दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। ताजा वैज्ञानिक आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष 2026 अब तक के पूरे इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। तमाम गणनाओं और मशहूर क्लाइमेट साइंटिस्ट जेम्स हानसेन की चेतालनी के आधार पर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 का तापमान इतिहास के सबसे गर्म साल हो सकता है।
यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) और बर्कले अर्थ (Berkeley Earth) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना लगातार मजबूत हो रही है. यदि यह 2024 के सर्वकालिक रिकॉर्ड को नहीं भी तोड़ पाता है, तो भी इसका इतिहास का दूसरा सबसे गर्म साल बनना लगभग तय माना जा रहा है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के छह प्रमुख वैश्विक डेटासेटों के अनुसार, इससे पहले वर्ष 2024 में पहली बार दुनिया का तापमान पूर्व-औद्योगिक सीमा से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था। वहीं 2023 और 2025 में भी तापमान इस आंकड़े के बेहद करीब रहा था।
रिकॉर्ड तोड़ता 'सुपर अल नीनो': भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति असामान्य रूप से मजबूत हो चुकी है। वर्तमान अल नीनो का चरम स्तर इतिहास के तीन सबसे खतरनाक अल नीनो वर्षों (1982-83, 1997-98 और 2015-16) से भी आगे निकल चुका है।
महासागरों का अभूतपूर्व तापमान: वैश्विक समुद्र की सतह का औसत तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। अगस्त और सितंबर 2026 में समुद्र की सतह का तापमान इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया है।
1.5°C की खतरनाक सीमा के करीब: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के डेटा के अनुसार, साल 2026 में पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक काल के मुकाबले 1.49°C से 1.5°C अधिक तक पहुंच रहा है, जो कि पेरिस जलवायु समझौते द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा का अंतिम छोर है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के डेटासेट दर्शाते हैं कि इस वर्ष का तापमान पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.49 डिग्री सेल्सियस से लेकर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग आधार वर्षों की वजह से कुछ डेटासेट में यह अंतर 1.4 डिग्री सेल्सियस अधिक दिख रहा है।
तमाम गणनाओं के बावजूद सभी डेटासेट इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि 2026 का तापमान इतिहास के सबसे गर्म साल 2024 को छोड़कर अब तक के अन्य सभी वर्षों से काफी अधिक रहा है।
प्रशांत महासागर में मई महीने में बने 'अल नीनो' का असर 2 से 4 महीने की देरी से देखने को मिलता है। इसी के चलते इस साल अगस्त को अब तक का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया था।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव वर्ष के अंत तक वैश्विक औसत तापमान को और अधिक बढ़ा सकता है। उत्तरी गोलार्ध के ठंडे महीनों में भी गर्मी बढ़ने के कारण 2026 का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को लांघकर नया रिकॉर्ड बना सकता है।
अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक के आगामी तीन महीने यह तय करने में काफी अहम माने जा रहे हैं कि यह साल कितना गर्म रहेगा। 1.5 डिग्री की सीमा को पार करने के लिए बेहद कम अतिरिक्त गर्मी की जरूरत है, जो अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए आसानी से संभव लग रही है।
ला नीना के बावजूद 2025 में भी तापमान इस खतरनाक स्तर के पास ही था। यदि 2026 में यह 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा स्थायी रूप से पार होती है, तो दुनिया भर में विनाशकारी मौसमी तबाही का खतरा काफी बढ़ जाएगा।
विश्व के मशहूर क्लाइमेट साइंटिस्ट जेम्स हानसेन सहित कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते तापमान के कारण आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में जानलेवा हीट वेव, सूखा और भारत समेत कई एशियाई देशों में मानसून और बारिश के पैटर्न में खतरनाक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।