डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की कान जेट और प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

सऊदी अरब और तुर्की के बीच डिफेंस डील की सुगबुगाहट, क्या अमेरिका से दूर हो रहे हैं प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान?

Turkey Kaan Jet: सऊदी अरब तुर्की से 'कान' फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर रहा है, जिससे अमेरिका चिंतित है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि रियाद केवल अमेरिकी हथियार खरीदे और पाकिस्तान से जेट न ले।

प्रिया सिंह

US Saudi Defense Partnership News: सऊदी अरब ने हाल के दिनों में तुर्की और पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी रहे सऊदी की तुर्की से पांचवीं पीढ़ी के 'कान' फाइटर जेट खरीदने की खबरों ने ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अमेरिका चाहता है कि रियाद उसकी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह वॉशिंगटन पर निर्भर रहे और केवल अमेरिकी हथियार ही खरीदे। हालांकि प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपनी रक्षा क्षमताओं में विविधता लाने के लिए नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

अमेरिका की बढ़ती चिंता

अमेरिकी अधिकारी इस बात से काफी परेशान हैं कि अगर सऊदी अरब तुर्की से रक्षा सौदे करता है तो इससे अमेरिकी हथियारों के बाजार में गिरावट आ सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल ही सऊदी को आधुनिक F-35 लड़ाकू विमान बेचने का प्रस्ताव दिया था ताकि रियाद को साधा जा सके। लेकिन तुर्की के 'कान' जेट में सऊदी की दिलचस्पी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक ही देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता है।

पाकिस्तान से जेट की डील पर स्पष्टीकरण

ट्रंप प्रशासन की 'डील-मेकिंग डिप्लोमेसी' के तहत अमेरिकी अधिकारियों ने सऊदी अरब से पाकिस्तान के साथ हो रहे संभावित रक्षा सौदों पर भी कड़ा स्पष्टीकरण मांगा है। वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और विरोध के बाद सऊदी अरब ने कथित तौर पर अमेरिका को यह भरोसा दिया है कि वह पाकिस्तान से JF-17 जेट नहीं खरीदेगा। ज्ञात हो कि पाकिस्तान ने यह विमान चीन की मदद से तैयार किया है जिसे अमेरिका अपने लिए एक बड़ी चुनौती मानता है।

तुर्की के विकल्प पर अडिग रियाद

पाकिस्तान के मामले में भरोसा देने के बावजूद सऊदी अरब ने तुर्की के 'कान' फाइटर जेट प्रोग्राम को रोकने के बारे में अमेरिका को फिलहाल कोई गारंटी नहीं दी है। अमेरिकी अधिकारी लगातार रियाद को यह समझाने में जुटे हैं कि तुर्की के विमान उनके लिए तकनीकी रूप से उतने अच्छे विकल्प साबित नहीं होंगे। वे सऊदी को F-15 और यूरो टाइफून जैसे विमानों की खूबियां गिना रहे हैं लेकिन फिलहाल सऊदी ने अपना इरादा नहीं बदला है।

विकल्पों की तलाश, दूरी नहीं

रियाद में नेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का तुर्की के जेट में दिलचस्पी लेना अमेरिका से दूर जाने का कोई संकेत नहीं है। सऊदी अरब वास्तव में अपनी सुरक्षा के लिए केवल नए और अधिक विकल्पों को तलाश रहा है ताकि वह किसी भी संकट में अकेला न पड़े। फिलहाल दुनिया में कोई भी देश रक्षा क्षेत्र में अमेरिका की जगह लेने में सक्षम नहीं है और रियाद भी यह अच्छी तरह समझता है।

क्षेत्रीय तनाव का असर

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि सऊदी अरब के इन फैसलों के पीछे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ बढ़ता हुआ तनाव और इजरायल को रोकने की रणनीति भी शामिल है। सऊदी अरब अपनी सैन्य शक्ति को इस तरह विकसित करना चाहता है कि वह क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में पीछे न रह जाए और अपना दबदबा बनाए रखे। इसी रणनीति के तहत वह अमेरिका से F-35 और तुर्की से कान जेट दोनों खरीदने पर एक साथ विचार कर सकता है।

ट्रंप प्रशासन की निर्यात नीति

डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन सऊदी की इस संभावित डील को केवल रक्षा संबंधों के तौर पर नहीं बल्कि अमेरिकी निर्यात को बढ़ाने के अवसर के तौर पर देख रहा है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका दुनिया का अकेला प्रमुख हथियार प्रदाता बना रहे ताकि उसकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव दोनों ही मजबूती से बरकरार रहें। सऊदी का किसी अन्य देश की ओर मुड़ना ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है जो उन्हें पसंद नहीं।

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