डोनाल्ड ट्रंप, पुतिन और मोजतबा खामेनेई, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

परमाणु बम नहीं, ये है ईरान का 'असली हथियार'! रूस के इस खुलासे से दुनिया में हड़कंप, कहा- कांप रही है दुनिया

Russia Claims Strait Of Hormuz: रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने दावा किया है कि ईरान का असली परमाणु हथियार 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

अमन उपाध्याय

Russia Claims Strait Of Hormuz Iran Real Nuclear Weapon: अमेरिका और ईरान के बीच घोषित अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के बीच रूस की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पश्चिम एशिया के समीकरणों को नई दिशा दे दी है। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईरान की असली ताकत उसके किसी पारंपरिक परमाणु बम में नहीं बल्कि 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में छिपी है। मेदवेदेव के अनुसार, इस समुद्री मार्ग की क्षमता इतनी अपार है कि यह ईरान का सबसे बड़ा और प्रभावी रणनीतिक हथियार बन चुका है।

सीजफायर के भविष्य पर रूस का संदेह

रूस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ यह सीजफायर आगे किस दिशा में जाएगा यह अभी पूरी तरह से अनिश्चित है।, मेदवेदेव का मानना है कि भले ही वर्तमान में एक अस्थायी शांति दिख रही हो, लेकिन ईरान ने पहले ही इस समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर दुनिया को अपनी ताकत का ट्रेलर दिखा दिया है।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर पेश किए गए पश्चिमी देशों के प्रस्ताव पर वीटो (Veto) कर दिया था।

दिमित्री मेदवेदेव पोस्ट

20% वैश्विक तेल सप्लाई का 'चोक पॉइंट'

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में होने वाली कुल तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। रूस का तर्क है कि इस क्षेत्र पर किसी भी तरह का नियंत्रण या व्यवधान सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है। हालिया महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के दौरान इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई थी।

ईरान की नाकेबंदी और 'गेम चेंजर' रणनीति

सूत्रों के अनुसार, ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी प्रभावी नाकेबंदी की थी और कई दुश्मन देशों के जहाजों को निशाना बनाया था। मेदवेदेव ने इसी कार्रवाई को ईरान का 'असली परमाणु परीक्षण' करार दिया है क्योंकि इसने बिना किसी परमाणु धमाके के पूरी दुनिया को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाने की क्षमता दिखाई है। हालांकि अब एक अस्थायी सीजफायर के तहत जहाजों की सीमित आवाजाही शुरू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसे अभी भी 'बेहद नाजुक' माना जा रहा है।

भू-राजनीति का बदलता चेहरा

कुल मिलाकर, रूस का यह संदेश वैश्विक शक्तियों के लिए एक चेतावनी की तरह है। मेदवेदेव के अनुसार, ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे एक अनूठी ताकत प्रदान करती है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर उसकी पकड़ न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी उसे विश्व राजनीति का सबसे बड़ा 'गेम चेंजर' बनाती है। अब देखना यह होगा कि शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में अमेरिका इस 'चोक पॉइंट' को सुरक्षित रखने के लिए ईरान के सामने क्या प्रस्ताव रखता है।

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