अमेरिका और ईरान टेंशन में मुस्लिम देशों का रूख, (डिजाइन फोटो) 
विदेश

बदर से 1973 तक... रमजान फिर बनेगा जंग का मैदान? अगर हमला हुआ तो क्या करेंगे मुस्लिम मुल्क

Iran US Tension: जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। रमजान के दौरान 6 हफ्तों तक चलने वाली बड़ी सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

अमन उपाध्याय

Trump Iran Attack Plan: दुनिया एक बार फिर विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक कोशिशें जिनेवा में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। जिनेवा वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से करीब तीन घंटे तक गहन चर्चा की।

हालांकि दोनों पक्षों ने कुछ प्रगति का दावा किया, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और पाबंदियों पर गहरे मतभेद अब भी बरकरार हैं। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि अगले दो हफ्तों के भीतर कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो अमेरिका और इजरायल एक साथ बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।

रमजान में महायुद्ध की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यह हमला होता है तो यह कोई छोटा ऑपरेशन नहीं बल्कि 6 हफ्तों तक चलने वाला एक बड़ा सैन्य अभियान हो सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि 19 फरवरी 2026 से रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत हो गई है। ऐतिहासिक रूप से रमजान के महीने का युद्ध से गहरा नाता रहा है जिसमें 624 ईस्वी में 'बदर की लड़ाई' और 1973 का अरब-इजरायल युद्ध प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिहादी समूह और क्षेत्रीय ताकतें इस महीने को 'सर्वोच्च बलिदान' के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं जिससे संघर्ष और अधिक हिंसक होने का डर है।

मिडिल ईस्ट में भारी सैन्य जमावड़ा

युद्ध की आहट के बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। क्षेत्र में इस समय दो विमानवाहक पोत, दर्जनों युद्धपोत और सैकड़ों अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात हैं। पिछले 24 घंटों में 50 अतिरिक्त F-35, F-22 और F-16 फाइटर जेट्स ने अपनी पोजीशन ले ली है। 150 से अधिक मिलिट्री कार्गो विमानों के जरिए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिडिल ईस्ट पहुंचाया गया है। यह तैयारी जून 2025 में हुए 12-दिवसीय युद्ध (ऑपरेशन राइजिंग लायन) से भी बड़े हमले की ओर इशारा कर रही है।

मुस्लिम देशों ने ट्रंप को दी चेतावनी

इस संभावित युद्ध को लेकर मुस्लिम जगत में गहरी बेचैनी है। तुर्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान में किसी भी तरह का विदेशी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर धकेल देगा। कतर, ओमान और यूएई जैसे देशों ने भी सैन्य टकराव का कड़ा विरोध करते हुए बातचीत की मेज पर आने की अपील की है। सऊदी अरब ने भी ईरान के साथ अपनी पुरानी प्रतिद्वंद्विता के बावजूद युद्ध का समर्थन करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इससे तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता को अपूरणीय क्षति होगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अगले दो हफ्तों की कूटनीति पर टिकी हैं।

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