सिर्फ साइकोलॉजिकल वॉर या होगी असली जंग? बस एक इशारे का इंतजार, ट्रंप के 'अटैक प्लान' से दुनिया भर में खलबली

America Iran Tension: मध्य पूर्व में अमेरिका ने 23 वर्षों की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है। वाइट हाउस के एक इशारे पर ईरान पर हमले की तैयारी है, जिससे तेल संकट और वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है।
Is it just a psychological war, or will there be a real war? Just waiting for a signal.
अमेरिका और ईरान में तनाव उच्चतम स्तर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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America Iran War Latest News: दुनिया एक बार फिर विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है जिसे देखते हुए अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य घेराबंदी शुरू कर दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने अपने समुद्री जहाजों, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ दुनिया के सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत 'USS गेराल्ड आर फोर्ड' को भी क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी कर ली है। यह पिछले 23 वर्षों में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी मानी जा रही है।

घंटों के भीतर हो सकता है हमला

वाइट हाउस और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति इतनी संवेदनशील है कि वाशिंगटन से इशारा मिलते ही अमेरिकी सेना महज कुछ ही घंटों के भीतर ईरान पर सर्जिकल या व्यापक हमला बोल सकती है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने अभी तक किसी बड़े हवाई हमले का अंतिम निर्णय नहीं लिया है लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प 'पूरी तरह टेबल पर' है। विशेषज्ञ इसे फिलहाल कूटनीतिक दबाव और 'साइकोलॉजिकल वॉर' के रूप में देख रहे हैं लेकिन वास्तविक हमले की तैयारियां जमीन पर तेज हैं।

ईरान की चेतावनी, 'डुबो देंगे जंगी बेड़ा'

अमेरिकी तैनाती पर पलटवार करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने कोई हिमाकत की तो ईरान का जवाब 'सीमित' नहीं होगा। ईरान ने धमकी दी है कि वे अमेरिकी विमानों और युद्धपोतों के जंगी बेड़े को समंदर में ही डुबो देंगे। इसके साथ ही, ईरान के प्रॉक्सी समूह जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती विद्रोही भी इस संघर्ष में सक्रिय होकर अमेरिका और उसके सहयोगियों (इजराइल, सऊदी अरब और यूएई) को निशाना बना सकते हैं।

रूस-चीन का रुख

इस संभावित युद्ध में रूस और चीन की भूमिका ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को हमले के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। वहीं, चीन और ईरान होर्मुज स्ट्रैट और ओमान की खाड़ी में 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' नाम से संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं जिसे क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 'हादसे' जैसा असर

यदि यह संघर्ष शुरू होता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट को बंद करने की धमकी दी है जहां से दुनिया के एक-तिहाई तेल का व्यापार होता है। ऐसा होने पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर शरणार्थी संकट और सामाजिक अस्थिरता उभर सकती है जिसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित न रहकर विकसित देशों तक फैल सकता है।

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